उत्तर प्रदेश के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने हाल ही में इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से "सबसे बड़ा धर्मांतरण सिंडिकेट" चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जबकि असम सरकार ने दारांग जिले में कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एक बेदखली अभियान चलाया था। इसको लेकर देश के कई हिस्सों में भाजपा सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है।
मशहूर इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी की उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के खिलाफ देश के मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पंजाब हरियाणा के बाद अब महाराष्ट्र और असम में लोगों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की है। महाराष्ट्र के ठाणे के मुंब्रा में एक मुस्लिम संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर उत्तर प्रदेश और असम सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने मौलाना को रिहा करने की मांग करते हुए यूपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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बता दें कि पिछले दिनों मुजफ्फरनगर के फुलत गांव के मौलाना कलीम सिद्दीकी को एटीएस ने मेरठ से गिरफ्तार किया था। कलीम सिद्दीकी की निशानदेही पर उसके साथी हाफिज इदरीश को पकड़ा गया है। कलीम सिद्दीकी पर अवैध धर्मांतरण और विदेशों से फंडिंग हुआ पैसा लेने का आरोप है। फिलहाल मौलाना एटीएस रिमांड पर है। एटीएस उसके करीबियों के बारे में अभी एटीएस और भी जानकारी जुटा रही है।
हाल ही में इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से "सबसे बड़ा धर्मांतरण सिंडिकेट" चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जबकि असम सरकार ने दारांग जिले में कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एक बेदखली अभियान चलाया था, जो बड़े पैमाने पर बंगालियों को धर्मांतरण कराया गया है।
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उलेमा कमेटी मुंब्रा-कौसा ने शुक्रवार को यूपी में मौलाना की गिरफ्तारी और असम में बेदखली अभियान के खिलाफ इन दोनों कार्रवाइयों को "अवैध" करार दिया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी तख्तियां, बैनर और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।