नोटबंदी गलत थी या पेटीएम या तकनीक?
उन्होंने कहा, जब नोटबंदी हुई थी तो सबसे ज्यादा विज्ञापन पेटीएम के थे। आज पेटीएम के खिलाफ सबसे ज्यादा मुकाबला कौन कर रहा है? सरकार भी कह रही है कि सबसे ज्यादा धनशोधन पेटीएम के जरिए हुआ है। सुले ने कहा, इतने वर्षों से सरकार क्या कर रही थी? क्या नोटबंदी गलत थी या पेटीएम गलत या तकनीकी गलत थी? फिर कहा जा रहा है कि इतनी नकदी बरामद की जा रही है।
चलन में कहां से आई इतनी नकदी
सुले ने आगे कहा, यह नकदी चलन में कहां से आई? यदि नोटबंदी की गई थी, तो इतनी नकदी कहां से आई, जिसे आप चुनिंदा तरीके से पकड़ रहे हैं? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
आरबीआई ने की थी पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर कार्रवाई
पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड पर पाबंदी लगाने का आदेश था। केंद्रीय बैंक ने धनशोधन और नो-योर-कस्टमर से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच की थी और इसके परिणामस्वरूप पाबंदी लगाई थी। इसका असर 29 फरवरी से होगा, जिससे पेटीएम की कई सेवाएं बंद हो जाएंगी। पेटीएम के खिलाफ आरबीआई की सख्त कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर सवाल उठाए थे। उन्होंने केंद्रीय एजेंसी की ओर से राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई थी।
बीजेपी-टीएससी सदस्य के बीच बहस
सदन में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच बहस हुई। दोनो सदस्यों के बीच कुछ उद्योगपतियों के साथ पीएम मोदी के करीबी संबंधों को लेकर विवाद हुआ। रॉय ने कहा, भारत के बाजार में तेजी का सबसे ज्यादा फायदा राजनीति के भीतरी लोगों को हुआ। वहीं, दुबे ने पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी सांसद पर कुछ उद्योगपतियों के साथ करीबी संबंध होने का आरोप है।