जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद पर एक बिजनेसमैन का अपहरण कर उसे जेल में लाकर मारने-पीटने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट 23 अप्रैल को विचार करेगा। इस मामले में अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने बृहस्पतिवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि राज्य सरकार ने जो रिपोर्ट दाखिल की है, उसमें इशारा किया गया है कि अतीक अहमद ने बिजनेसमैन का अपहरण किया था। साथ ही हंसारिया ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के वक्त जेल परिसर में न तो सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे और न ही जेल मैनुअल का पालन हुआ। हालांकि पीठ ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और यूपी सरकार की रिपोर्ट पर 23 अप्रैल को विचार करने का निर्णय लिया है।
मालूम हो कि गत आठ जनवरी को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पीठ को इस घटना की जानकारी दी थी। उपाध्याय की याचिका में आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने वाले नेताओं पर आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने की गुहार की गई है।
अतीक पर दर्ज हैं 20 से ज्यादा गंभीर मुकदमे
इस मामले के मुताबिक रियल एस्टेट डीलर मोहित जायसवाल ने गत 28 दिसंबर को अतीक अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि मोहित का लखनऊ से अपहरण कर देवरिया जेल में लाया गया। वहां अतीक अहमद और उसके लोगों ने मोहित की पिटाई की थी। एफआईआर के बाद यूपी प्रशासन ने जेल में छापा भी मारा था। बाद में अतीक को देवरिया से बरेली जेल भेज दिया गया था। गौरतलब है कि अतीक पर 20 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।