दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के पर्याप्त कदम नहीं उठाने पर केंद्र व राज्यों को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, यह सालाना घटना बन चुकी है। लेकिन समस्या यह है कि नौकरशाही जड़ हो गई है, चाहती है कि कोर्ट बताए क्या करना है, बाल्टी कैसे उठाएं, आग कैसे बुझाएं, पानी का छिड़काव करना चाहिए या नहीं।
सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। नौकरशाही कहती है- हम कुछ नहीं करेंगे। अदालत को निर्देश पारित करने दें और हम केवल यह कहते हुए हस्ताक्षर कर देंगे कि अदालत ने इसे निर्देशित किया है। कार्यपालिका के इसी रवैये के चलते जब दिल्ली की हवा पूरी तरह दमघोंटू हो गई है तो कोर्ट कदम उठाने को मजबूर है।
पीठ ने पूछा, हमें बताएं कि साल के बाकी समय में केंद्र और राज्य क्या कर रहे थे? जब घर में आग लगती है, तो आप कुआं खोदना शुरू कर देते हैं। सिर्फ इसलिए कि दिल्ली और यूपी, हरियाणा व पंजाब के आसपास के कुछ इलाके इसमें शामिल हैं, हमें हस्तक्षेप करना होगा। अन्यथा यह एक ऐसी चीज है, जिस पर हाईकोर्ट विचार कर सकता है। पीठ ने केंद्र, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब की राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों पर असंतोष जताया। पीठ अब 24 नवंबर को सुनवाई करेगी।
टीवी पर बहस से फैल रहा ज्यादा प्रदूषण
पीठ ने कहा, टीवी पर बहस अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है। बयान संदर्भ से बाहर किए जाते हैं। सबका अपना एजेंडा है। हम यहां एक समाधान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमें दोषारोपण के खेल में कोई दिलचस्पी नहीं है। हर मीडिया संगठन के अपने आंकड़े होते हैं। इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रदूषण में योगदान के कारकों पर पिछली सुनवाई के संबंध में टेलीविजन पर की गई ‘गैर जिम्मेदाराना’ टिप्पणी का मुद्दा उठाया था।
पांच सितारा होटलों में बैठे लोग किसानों को दोषी ठहरा रहे
दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, सर्दियों के दौरान पराली जलाने का वायु प्रदूषण में एक बड़ा योगदान है। इस पर पीठ ने कहा, दिल्ली में पांच सितारा होटल में बैठे लोग किसानों को दोषी ठहरा रहे हैं। उनकी दुर्दशा कोई नहीं समझता, बस आरोप लगाते हैं। यदि आपके पास समस्या का वैज्ञानिक विकल्प है तो लाइए हम उस पर गौर करते हैं। आईआईटी कानपुर ने कुछ साल पहले एक अध्ययन में कहा था कि प्रदूषण में पराली व पटाखों का मुख्य योगदान नहीं था। क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है?
केंद्रीय कर्मियों को सार्वजनिक वाहन से आने की सलाह
मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में अपने सभी कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक वाहनों से दफ्तर आने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया कि अगर कर्मचारी निजी या सरकारी वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वह इसे पूल व्यवस्था के तहत चलाएं। जिसमें एक या आसपास के इलाकों से आने वाले कर्मचारी एक ही वाहन से साथ आ जाएं। इसके अलावा सभी कर्मचारियों को अनिवार्य तौर पर मास्क लगाने और अन्य कोरोना नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया।
केंद्र को 100 फीसदी कर्मचारियों को दफ्तर बुलाने की क्या जरूरत: पीठ
पीठ ने मेहता से पूछा, आप सभी केंद्रीय कर्मचारियों को दफ्तर क्यों बुला रहे हैं? आपको 100 फीसदी कर्मचारियों की जरूरत नहीं है। आपने कोविड-19 के दौरान प्रतिबंधित किया था। 100 लोगों के आने के बजाय आपके पास 50 हो सकते हैं। मेहता ने कहा, दिल्ली में केंद्रीय कार्यालयों में उपस्थिति कम करने का प्रभाव पूरे भारत में होगा। केंद्र के कर्मचारियों के दफ्तर आने का प्रदूषण में योगदान न्यूनतम है। हम कार-पूलिंग व सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था करने को तैयार हैं।
21 तक न दें कठोर निर्णय
मेहता ने पीठ से 21 नवंबर तक कोई कठोर निर्णय नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा, मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने आश्वासन दिया है 21 नवंबर के बाद स्थिति बेहतर होगी। इसलिए राजधानी में लॉक डाउन जैसे कदम उठाने से पहले थोड़ी प्रतीक्षा की जाये। पीठ ने कहा, ठीक है वह 21 नवंबर के बाद पूरी तरह से बंद के आदेश की संभावना पर विचार करेगी।
15 साल पुराने वाहनों को हटाने पर भी सवाल पूछे
पीठ ने दिल्ली की सड़कों से 10 और 15 साल पुराने वाहनों को हटाने की नीति लागू करने पर भी सवाल उठाया। पीठ ने कहा, सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषण का मुख्य कारण वाहन हैं, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर हाई-फाई कारें चलती हैं। इसे कैसे रोकेंगे। दिल्ली सरकार का कहना है कि अगर नियम पड़ोसी राज्यों में लागू नहीं किये गए तो वाहनों पर प्रतिबंध लगाने या वर्क फ्रॉम होम का कोई मतलब नहीं। पीठ ने कहा, हमने सोचा था कि एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग हमें इसे रोकने के लिए कदम बताएगा।
केंद्र ने सुझाए प्रदूषण पर अंकुश लगाने के उपाय
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वायु प्रदूषण पर बने आयोग ने यूपी, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान के साथ बैठक के बाद वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के कुछ कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत सभी निजी व सरकारी शिक्षण संस्थानों को बंद करना। कुछ छूट के साथ ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध और राष्ट्रीय राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में छह थर्मल बिजली संयंत्रों को बंद करने का सुझाव दिया है। आयोग ने पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालयों के सचिवों, विद्युत, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, और दिल्ली व अन्य राज्यों के मुख्य सचिव के साथ विस्तृत परामर्श किया था।
किसानों को पराली हटाने वाली मशीन मुफ्त में देने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने यह बात वायु प्रदूषण के संबंध में पर्यावरण कार्यकर्ता आदित्य दुबे और कानून के छात्र अमन बांका की ओर से दाखिल की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। इस याचिका में शीर्ष अदालत से छोटे और सीमांत किसानों को पराली हटाने वाली मशीन मुफ्त में मुहैया कराने के लिए उचित निर्देश देने की मांग की गई है।