शादी समारोह के जश्न में गोलीबारी की घटनाओं को सर्वोच्च अदालत ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कोर्ट का कहना है कि ऐसी कार्रवाई के अक्सर विनाशकारी परिणाम होते हैं। अदालत ने यह टिप्प्णी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें आरोपी ने 2026 में एक शादी समारोह में गोलीबारी की थी। गोलीबारी के कारण एख युवक की मौत हो गई। हत्या के आरोप में युवक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने आज रद्द कर दिया।
सर्वोच्च अदालत ने पलटा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि विवाह समारोह के दौरान गोलियां दागना करना हमारे देश में एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्रचलित प्रथा है। यह मामला इसी तरह की अनियंत्रित और अनुचित गोलीबारी के विनाशकारी परिणामों का प्रत्यक्ष उदाहरण है। बता दें, ट्रायल कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी शाहिद अली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे पीठ ने पलटते हुए आरोपी को धारा 304 भाग II (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अली रिहा हो गया क्योंकि उसने आठ साल पहले ही जेल में काट लिए थे।
बता दें कि, 17 मार्च, 2016 को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के जसराना पुलिस स्टेशन में गुलाब अली नाम के एक व्यक्ति ने शाहिद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।