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क्या हमारे आदेश कोल्ड स्टोरेज में डालने के लिए होते हैं: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 19 Apr 2016 09:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से बने धार्मिक ढांचों को हटाने को लेकर अदालती निर्देशों का पालन नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि क्या हमारे निर्देश कोल्ड स्टोरज में डालने के लिए हैं?
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वास्तव में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने रिपोर्ट दाखिल नहीं की। इस बात से नाराज न्यायमूर्ति वी गोपालगौड़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम इस तरीके के व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि हम आदेश किसलिए पारित करते हैं? क्या हम आदेश कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए पास करते हैं?

पीठ इस कदर नाराज थी कि एक वक्त तो उन्होंने सभी राज्यों को तलब करने का निर्णय ले लिया लेकिन राज्यों की ओर से पेश वकीलों के आग्रह पर उन्हें एक और मौका दे दिया गया। पीठ ने उन्हें दो हफ्ते के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर इस बार रिपोर्ट नहीं दाखिल की गई तो संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में पेश होना होगा।
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मालूम हो कि अदालत ने सभी राज्यों को सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से स्थित धार्मिक ढांचे सहित तमाम ढांचों को हटाने का आदेश दिया था। आठ मार्च को छत्तीसगढ़ सरकार केखिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। जिस पर अदालत ने राज्य को वास्तविक स्थिति बताने के लिए कहा था। अदालत ने सभी राज्यों को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।
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अवैध धार्मिक स्थलों के पीछे आस्था नहीं, पैसे कमाना है वजह

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई केदौरान यह भी कहा कि सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रूप से बने धार्मिक स्थल के पीछे लोगों की आस्था जैसी कोई बात नहीं है बल्कि लोग इसकी वजह से पैसे कमा रहे हैं।

पीठ ने कहा कि अगर लोग भगवान को मानते तो ऐसा नहीं करते। जो ऐसा कर रहे हैं, वास्तव में वे भगवान का अपमान कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि सड़कों और फुटपाथों पर चलना लोगों का अधिकार है, निश्चय ही भगवान इसमें अवरोध उत्पन्न नहीं करना चाहते।
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