सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के पूर्व मंत्री केटी जलील की लोकायुक्त की रिपोर्ट पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जलील ने एक लोकसेवक के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग एक रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए किया।
जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार से इनकार कर दिया।
पीठ द्वारा मामले की सुनवाई से इनकार होने का आभास होने पर मंत्री के वकील ने आवेदन वापस ले लिया और मामले को याचिका वापसी के साथ खारिज कर दिया गया।
पूर्व मंत्री के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि लोकायुक्त बिना उनके मुवक्किल को सुने निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री के रिश्तेदार ने प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम लीग पार्टी के सदस्य के खिलाफ एनपीए खाते से एरियर निकासी को लेकर प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद शिकायत दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि लोकायुक्त की ओर से प्रक्रियागत खामियां नहीं थी जैसा याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है।
डीएमआरसी के पेड़ गिराने की अनुमति वाली याचिका की सुनवाई के लिए पीठ गठित
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डीएमआरसी से कहा है कि कुछ परियोजनाओं के लिए पेड़ काटने की अनुमति मांगने से जुड़ी उसकी याचिका की सुनवाई के लिए पीठ गठित कर दी गई है।
डीएमआरसी ने कहा था कि उसकी कुछ वर्तमान परियोजनाओं के काम को पूरा करने के लिए करीब 10 हजार पेड़ गिराने की जरूरत है। मगर सक्षम प्राधिकारियों से इसकी अनुमति नहीं मिल पाने के कारण कंपनी को प्रतिदिन करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और उसके मजदूर बेकार बैठे हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डीएमआसी की इस याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया था। इसपर चीफ जस्टिस एनवी रमण ने कहा कि उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए पीठ का गठन कर दिया गया है।