सुप्रीम कोर्ट ने अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार के दौरान हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 26 फीसदी शेयरों के विनिवेश मामले में सीबीआई को एक नियमित मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि बोली प्रक्रिया में गड़बड़ी व शेयरों की बिक्री में अनियमितता को देखते हुए प्रथम दृष्टया जांच का मामला बनता है।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न की पीठ ने कहा कि 2002 में एचजेडएल के विनिवेश की प्रारंभिक जांच को नियमित मामले में बदलने के लिए सीबीआई के विभिन्न अधिकारियों की सिफारिश अदालत को यह बताती है कि प्रथम दृष्टया यह मामला जांच का है। पीठ ने ये भी कहा कि 2002 के बाद एचजेडएल सरकारी कंपनी नहीं है, ऐसे में शीर्ष अदालत ने खुले बाजार में केंद्र की शेष 29.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के विनिवेश की अनुमति दी।
2002 में मामला दर्ज करने के बाद जांच हुई थी बंद
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि 2002 में विनिवेश में कथित अनियमितताओं में नियमित मामला दर्ज करने की सिफारिश के बावजूद, प्रारंभिक जांच बंद कर दी गई थी, कोर्ट ने कहा कि जब इसकी जांच चल रही थी तो बंद करने की क्या जरूरत थी। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को नियमित मामला दर्ज करने और निश्चित समय में अपनी रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।