प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा के वकील को आश्वासन दिया कि वह लोकसभा से मोइत्रा के निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे। वहीं, झारखंड से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया है। दुबे की शिकायत के बाद ही मोइत्रा का लोकसभा से निष्कासन हुआ था।
इससे पहले मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मोइत्रा की याचिका की लिस्टिंग पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ फैसला करेंगे। टीएमसी की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने महुआ मोइत्रा की याचिका का जिक्र जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच के सामने किया। इसके बाद दोनों जजों ने कहा कि टीएमसी नेता की याचिका पर फैसला चीफ जस्टिस को करना है।
गौरतलब है कि लोकसभा सदस्यता छीने जाने के खिलाफ महुआ मोइत्रा ने सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कैश के बदले सवाल मामले में घिरने और आचार समिति की तरफ से लोकसभा में रिपोर्ट रखे जाने के बाद सदन के अध्यक्ष ने उन्हें निष्कसित कर दिया था। इसी के खिलाफ टीएमसी सांसद सर्वोच्च न्यायालय पहुंचीं हैं।
पैसे लेकर सवाल पूछने का पूरा मामला क्या है?
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कहने पर संसद में सवाल पूछने का आरोप है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और उनके खिलाफ लोकसभा स्पीकर से शिकायत कर जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया था कि ये सबूत वकील जय अनंत देहादराई द्वारा प्रदान किए गए थे।
लोकसभा स्पीकर को लिखे अपने पत्र में दुबे ने कहा था कि उन्हें वकील और महुआ के पूर्व दोस्त जय अनंत का एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने मोइत्रा और जाने-माने बिजनेस टाइकून दर्शन हीरानंदानी के बीच सवाल पूछने के लिए रिश्वत के आदान-प्रदान के सबूत साझा किए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जय ने एक विस्तृत शोध किया है जिसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि हाल ही में, मोइत्रा ने संसद में उनके द्वारा पूछे गए कुल 61 में से लगभग 50 प्रश्न दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों को बचाने के लिए थे। हालांकि, महुआ मोइत्रा ने जय अनंत का जिक्र करते हुए कहा कि आरोप झूठ पर आधारित थे।
आरोप यह भी है कि कारोबारी हीरानंदानी अलग-अलग स्थानों से एवं अधिकतर दुबई से सवाल पूछने के लिए मोइत्रा की ‘लॉगइन आईडी’ का इस्तेमाल करते थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने पूरा मामला आचार समिति के पास भेज दिया था।