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SC: चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, जानें पूरा मामला

Mon, 15 Apr 2024 11:13 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिवक्ता नेदुमपारा ने कहा कि इस अदालत ने योजना के खिलाफ दायर याचिका पर विचार किया और योजना को रद्द कर दिया। बिना यह देखे कि जनता की राय अलग हो सकती है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना पर रोक लगाने का ऐतिहासिक फैसला 15 फरवरी को सुनाया था। अब इस फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। इसको लेकर शीर्ष अदालत में एक पुनर्विचार की याचिका दायर की गई है। 

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अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुमपारा द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि इस अदालत ने याचिका (योजना के खिलाफ) पर विचार किया और योजना को रद्द कर दिया, बिना यह देखे कि ऐसा करने में यह संसद पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य कर रहा है, जो विशेष रूप से विधायी और कार्यकारी नीति के विशिष्ट क्षेत्र में आता है।

यह मुद्दा न्यायसंगत
नेदुमपारा ने अपनी याचिका में कहा, 'अदालत यह मानते हुए भी कि यह मुद्दा न्यायसंगत है, फिर भी इस पर ध्यान देने में असफल रही। याचिकाकर्ताओं ने किसी भी विशेष नुकसान का कोई दावा नहीं किया। ऐसे में उनकी याचिका पर फैसला नहीं लिया जाना चाहिए था।' 
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जनता की राय अलग हो सकती है
उन्होंने कहा कि न्यायालय इस बात पर ध्यान देने में भी पीछे रही की जनता की राय अलग हो सकती है। इस देश के अधिकतर लोग शायद इस योजना के समर्थन में हो सकते हैं। इसलिए जनहित याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ लोगों की बात को भी सुना जाना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि अदालत का कर्तव्य है कि वे जनता का पक्ष जानें। इसलिए कार्यवाही को प्रतिनिधि कार्यवाही में बदलना चाहिए।

यह है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया और सरकार को किसी अन्य विकल्प पर विचार करने को कहा था। पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से इस योजना के साथ-साथ आयकर अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में किए गए संशोधनों को भी रद्द कर दिया था। न्यायालय ने कई निर्देश भी जारी किए थे, जिसमें 12 अप्रैल, 2019 से राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त और भुनाए गए चुनावी बॉन्ड के विवरण को सार्वजनिक करना भी शामिल था।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को इसको खारिज कर दिया था कि यह योजना पारदर्शी है। न्यायालय ने राय दी थी कि ऐसे चुनावी बॉन्ड काले धन पर अंकुश लगाने वाले उपाय नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की आलोचना करते हुए कहा था कि राजनीतिक पार्टियों को हो रही फंडिंग की जानकारी मिलना बेहद जरूरी है। इलेक्टोरल बॉन्ड सूचना के अधिकार का उल्लंघन हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आईटी दी को एनवायरोनिक्स ट्रस्ट की आय का पुनर्मूल्यांकन करने की अनुमति 
सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को गैर सरकारी संगठन 'एनवायरोनिक्स ट्रस्ट' की कर योग्य आय के पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है।इस संगठन पर विकास परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आरोप है। हालांकि, अदालत ने कहा कि मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि एनवायरोनिक्स ट्रस्ट आयकर विभाग की जांच में सहयोग करेगा। पीठ ने यह अनुमति दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले साल के आठ नवंबर के आदेश को चुनौती देने वाली एनजीओ की अपील पर सुनवाई कर रही थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के सर्वे  पर रोक बढ़ायी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक बढ़ा दी जिसमें मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। इस बीच, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा दायर याचिकाओं को पांच अगस्त से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। 

दिव्यांगों को आरक्षण की मांग पर केंद्र व राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के कानून के तहत दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए जिला अदालतों में न्यायिक नियुक्तियों में चार फीसदी आरक्षण समेत राहत की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों और सभी हाईकोर्ट से जवाब मांगा है। जनहित याचिकाओं में पीडब्ल्यूडी के अधिकारों से संबंधित कानून के अनुसार न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए मौजूदा न्यायिक सेवा नियमों को ठीक करने के लिए केंद्र और अन्य को निर्देश देने की भी मांग की गई है।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो पीआईएल दाखिल करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील संजय पारिख की दलीलों पर गौर किया कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के तहत न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में दिव्यांग व्यक्तियों को उनका हक नहीं मिल रहा है। 2016 का कानून एक विशेष कानून है जिसे दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को प्रभावी बनाने के लिए लागू किया गया है। नोएडा निवासी रेंगा रामानुजम और बंगलूरू निवासी सुमैया खान की तरफ से पीआईएल दायर की गई हैं। जनहित याचिका में विभिन्न राज्यों में कानून के कई कथित उल्लंघनों का उल्लेख किया गया है।

संदेशखाली पर जवाब के लिए लोस को दो हफ्ते का समय

सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखाली मामले में पश्चिम बंगाल के शीर्ष नौकरशाहों की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए लोकसभा सचिवालय को दो हफ्ते का समय दिया है। नौकरशाहों ने लोकसभा की विशेषाधिकार समिति की ओर से तलब किए जाने को चुनौती दी है। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से पेश कि गए तथ्यों पर गौर करने के बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध की। भाजपा सांसद सुकांत मजूमदार की ओर से अधिकारियों के खिलाफ दायर कदाचार की शिकायत पर समिति ने इन नौकरशाहों को तलब किया है। मजूमदार ने आरोप लगाया है कि वह उत्तर 24 परगना जिले के हिंसा प्रभावित गांव संदेशखाली का दौरा करने की कोशिश कर रहे थे, तब उनके और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया और आगे जाने से रोक दिया।
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मणिपुर हिंसा के विस्थापितों के लिए मतदान की मांग वाली अर्जी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर हिंसा के कारण विस्थापित लोगों को मतदान का अधिकार देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में मांग की गई थी कि जातीय हिंसा के कारण विस्थापित लगभग 17,000 लोगों को आगामी आम चुनाव में वोट देने के अधिकार का उपयोग करने का मौका मिलना चाहिए। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि याचिका बहुत देर से दायर की गई है। चुनाव आयोग के लिए सिर्फ तीन दिन में विस्थापितों के लिए वोट डालने की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। मणिपुर में 19 अप्रैल को मतदान होना है।
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