सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पत्रकारिता के छात्र थवाहा फासल को जमानत दे दी। दरअसल, फासल माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोपी आरोपी था। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति एएस ओका की पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें फैसल की जमानत रद्द कर दी गई थी।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा दायर वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें दूसरे आरोपी अल्लान शोएब की जमानत मंजूर करने का निचली अदालत का आदेश बरकरार रखने संबंधी केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले में गिरफ्तार दूसरे छात्र शोएब की कम उम्र और उसके स्वास्थ्य के मद्देनजर उसकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने 23 सितंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
फैसल और शोएब क्रमशः पत्रकारिता और कानून के छात्र हैं। वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की शाखा समिति के सदस्य थे। उन्हें दो नवम्बर 2019 को कोझिकोड से गिरफ्तार किया गया था। वाम शासित राज्य में उनकी गिरफ्तारी की व्यापक आलोचना हुई थी। पुलिस ने उनके पास से कथित तौर पर आपत्तिजनक लिखित एवं छपी हुई सामग्री जब्त की थी।
माओवादियों से कथित संबंधों के कारण केरल में माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। एनआईए ने फासल को नवंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी ने चार्जशीट दायर कर फासल पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन को शरण देने और उससे जुड़ने का आरोप लगाया था।