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Supreme Court: 'आरोपी को पेशी के बिना बेल नहीं देना गलत आधार'; आपराधिक केस में जमानत पर अदालत की अहम टिप्पणी

Mon, 29 Jan 2024 09:02 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मुकदमों में जमानत देने की शर्तों पर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि आपराधिक मुकदमें में आरोपी को जमानत देने के लिए उसकी व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की गैर-हाजिरी को जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
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जमानत की शर्तों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश - फोटो : amar ujala graphics
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। आपराधिक मामलों में जमानत देने के मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी की गैर-हाजिरी को जमानत याचिका खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। न्यायमूर्ति बीआर गवई, जस्टिस संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को कहा कि आपराधिक मामले में अगर आरोपी अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुआ तो केवल इसी आधार पर जमानत याचिका को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। 
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जमानत के पैमाने अलग-अलग हैं
हाईकोर्ट के छह सितंबर, 2023 के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अपील करने वाला व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हो सका, केवल इस आधार पर जमानत याचिका खारिज करना गलत है। कोर्ट ने कहा कि जमानत देने और याचिका खारिज करने के पैमाने अलग-अलग हैं।

जमानत खारिज कर सकती है अदालतें
सुप्रीम कोर्ट ने 24 जनवरी को पारित आदेश में कहा, अगर यह पाया जाता है कि जिस शख्स को जमानत का लाभ मिला है, उसने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया है तो जमानत याचिका रद्द की जा सकती है। गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया जा रहा है तो पहले से दी गई जमानत भी रद्द की जा सकती है।
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हाईकोर्ट में क्यों खारिज हुई याचिका
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने कृष्ण शर्मा नाम के आरोपी को जमानत देने से इस आधार पर इनकार कर दिया कि वह अदालत के निर्देश के बावजूद कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने में विफल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत में तीन जजों की पीठ ने नोट किया कि वीआईपी आंदोलन के कारण यातायात बाधित था और ट्रैफिक जाम के कारण वह समय पर कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हो सके। आरोपी कृष्ण शर्मा के वकील भी उच्च न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सके थे, क्योंकि याचिकाकर्ता ने वकील का वकालतनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) वापस ले लिया था।

नाराज हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी का निर्देश दिया
इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सुनवाई की तारीख पर न तो आरोपी और न उनके वकील अदालत में मौजूद रहे। याचिकाकर्ताओं का बर्ताव कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए ढिठाई और खराब रूख (insolent stance) को दिखाता है। हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को अरेस्ट वारंट जारी कर कार्रवाई का निर्देश भी दिया था।
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