महाराष्ट्र की सियासत के लिए एक बार फिर बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना विधायकों की अयोग्यता संबंधी याचिका पर फैसला लेने के लिए समयसीमा तय करने का निर्देश दिया। फैसला लेने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को उच्चतम न्यायालय की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
तुषार मेहता का जवाब
एसजी तुषार मेहता ने सिब्बल की दलीलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह उपहास करने जैसा है। एक बात नहीं भूलनी चाहिए कि स्पीकर एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं। हम अन्य संवैधानिक निकाय के सामने उनका उपहास नहीं उड़ा सकते।
हम इसे दो सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करेंगे: कोर्ट
इस पर सीजेआई ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ भी नहीं हुआ है। अंत में पीठ ने मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। सीजेआई ने कहा कि हम इसे दो सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करेंगे।
उचित समय में निर्णय लिया जाएगाः नारवेकर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नारवेकर ने कहा कि उन्हें आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई का अपना तरीका होता है। उचित समय में निर्णय लिया जाएगा। नारवेकर ने यह भी कहा, मेरी जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि स्पीकर एक सांविधानिक पद है और कोर्ट उसके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।