प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून बिलों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान तीनों कृषि कानून बिलों को वापस लेने की जैसी ही घोषणा हुई, सोशल मीडिया पर भी कई तरह के पोस्ट व मीम्स की बौछार आ गई। राजनेताओं से लेकर आम आदमी ने भी इस कृषि कानून बिल की वापसी पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी, किसी ने इस फैसले को किसानों की जीत बताया तो कोई इस घोषणा से दुखी भी दिखाई दिया।
एक सोशल मीडिया यूजर्स ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है कि किसानों के प्रदर्शन के आगे पीएम मोदी सरकार को अभियान टूट गया, तो वहीं एक यूजर ने कहा कि इस फैसले ने 100 करोड़ हिंदुस्तानियों का दिल तोड़ दिया है।
ट्विटर पर सौरव चंदा ने लिखा है कि 'यह किसानों की जीत है तो भारत की हार है। वे एक बार भी इन कानूनों को समझ नहीं पाए। यह उनके हित के लिए था। बुरा दिन। चौथी पीढ़ी के युद्ध में भारत कैसे हार रहा है, यह उसका उदाहरण है।'
सिद्धार्थ गुप्ता ने लिखा है कि- 'विरोध इसलिए ही महत्वपूर्ण है। एक लोकतंत्र के रूप में एक सत्तावादी शासन में कभी-कभी मतपत्र के अलावा अन्य तरीकों से आवाज उठानी पड़ती है। मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद नहीं दूंगा, लेकिन खुशी है कि ऐसा हुआ।'
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है कि जिन लोगों ने कृषि कानूनों को मास्टरस्ट्रोक बताते हुए बड़े-बड़े आर्टिकल लिखे थे, वे अब कृषि कानूनों की वापसी को मास्टरस्ट्रोक बताने के लिए फिर से आर्टिकल लिखेंगे।
राजीव राजपूत ने लिखा है, जो नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें तय करना चाहिए कि महत्वपूर्ण क्या है? हिंदुस्तान या खालिस्तान को हवा देना...ऐतिहासिक फैसला लिया गया, राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में फैसला