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निवेश के मंत्र 2: कोरोना महामारी के बीच ना डरें निवेशक, इमरजेंसी फंड पर दें ज्यादा जोर

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 28 Apr 2020 05:41 PM IST
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Investment in banks and large corporate funds is better - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस ने मानव जाति को यह संदेश अच्छे से दे दिया है कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। कोरोना महामारी संपूर्ण लॉकडाउन, क्वारंटीन, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का बंद होना और बाजार में तेज उठापटक की वजह बनी।



कोरोना से लड़ने के लिए देश के डॉक्टर और बड़े जानकारों ने लोगों से उनके स्वास्थ्य के देखभाल करने की अपील की लेकिन शारीरिक हेल्थ के साथ साथ आर्थिक हेल्थ को भी उतना ही महत्व देना जरूरी है। 


फाइनेंशियल प्लानिंग करने से किसी भी बड़ी आपदा से लड़ने में मदद मिल जाती है। इसलिए जरूरी है कि नौकरी शुरू करते ही सबसे पहले खुद की फाइनेंशियल प्लानिंग करें। कोरोना जैसी आपदा हावी ना हो इसके लिए आर्थिक तौर पर खुद को मजबूत करना बेहद जरूरी है। फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए ये बिंदु मददगार हो सकते हैं...


1. इमरजेंसी फंड को और मजबूत बनाएं

कोरोना वायरस पहले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर चुका है और इसके बाद में कड़े परिणाम भी देखने को मिलेंगे। ऐसे समय में जरूरी है कि आप इमरजेंसी फंड बढ़ाएं। इमरजेंसी फंड के लिए कहा जाता है कि आपके कुल खर्चों के छह महीने के हिसाब जितनी राशि इमरजेंसी फंड में होनी चाहिए।  


लॉकडाउन की वजह से कई क्षेत्रों में नौकरी जाने की खबरें हैं, ऐसे समय में इमरजेंसी फंड काम आता है। जब तक नई नौकरी नहीं मिल जाती तब तक आजीविका के लिए यह फंड इस्तेमाल किया जा सकता है। 


स्वास्थ्य बीमा कोरोना वायरस को कवर करता है या नहीं इस पर ज्यादा स्पष्टीकरण नहीं है लेकिन अगर आपकी बीमा कंपनी कोरोना के इलाज के लिए बीमा कवर देने से मना करती है तो इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल कर इलाज किया जा सकता है।


2. कर्ज की ईएमआई का भुगतान डिजिटल तरीके से करें

अगर आपने होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लिया है तो आप आसानी से अपने पेमेंट मो़ड को ऑफलाइन से बदलकर ऑनलाइन कर सकते हैं। लॉकडाउन की वजह से बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान बंद हैं जिसकी वजह से ऑफलाइन मोड में ईएमआई का भुगतान नहीं हो सकता।
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हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांता दास भी बैंकों से अपील कर चुके हैं कि कोविड-19 जैसी आपदा के बीच डिजिटल ट्रांसजैक्शन को ज्यादा से ज्यादा महत्व दें। यही नहीं अगर ऑनलाइन ट्रांसजैक्शन में मुश्किल आती है तो बैंक से संपर्क कर भुगतान के लिए और समय मांग सकते हैं।


3. लंबी अवधि के निवेश को ना रोकें

कोरोना वायरस महामारी की वजह से शेयर बाजार पहले ही काफी उठापटक देख चुका है। निवेशकों के कई हजार करोड़ रुपये शेयर बाजार में गंवाएं हैं। लेकिन कई वित्तीय जानकारों ने लंबी अवधि के निवेश में बने रहने की सलाह दी है। 


म्यूचुअल फंड में निवेश करके बाजार की उठापटक से आ रही गिरावट से संभला जा सकता है, बल्कि लंबी अवधि में निवेश कर अच्छे और मनचाहे रिटर्न भी लिए जा सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाजार में गिरावट के दौरान डिस्काउंट पर शेयर खरीद लें ताकि जब बाजार में उछाल हो तो अच्छी रिटर्न मिल जाएं।


4. स्वास्थ्य बीमा की समीक्षा करें

जब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना बीमारी को महामारी को नहीं घोषित किया था तब तक ज्यादातर बीमा कंपनी कोरोना के इलाज का कवरेज दे रहे थे। लेकिन महामारी घोषित करते ही कई बीमा कंपनियों ने अपनी स्कीम से कोरोना बीमारी को हटा दिया। 


हालांकि आईआरडीएआई ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को कोविड-19 के कवरेज देने की अपील की थी। अगर इसी बीच आप स्वास्थ्य बीमा ले रहे हैं तो इस बात पर ध्यान दें कि पॉलिसी में कोरोना के लिए कवरेज है या नहीं। इसके अलावा आपने जो पहले से पॉलिसी ली है उसमें कोरोना के लिए कवरेज का विकल्प जरूर देख लें।


5. रोजाना के खर्च और बजट की समीक्षा करें

ऐसी स्थिति में अपने गैर जरूरी खर्चों को सीमित कर सकते हैं। अगर भविष्य में स्थिति और खराब होती है तो आप बचत का इस्तेमाल कर रोजाना के खर्चों का प्रबंध कर पाएंगे। कोरोना जैसी स्थिति में जब अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही हो तब गैर जरूरी खर्चों को सीमित करना जरूरी हो जाता है। 


6. अपने निवेश की समीक्षा करें

बाजार की उठापटक में शेयर खरीदना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इस बीच अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर सकते हैं और इक्विटी और डेट में किए गए निवेश की समीक्षा कर सकते हैं। बाजार की उठापटक को देखते हुए सोने में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। 


इसके अलावा अगर कम जोखिम उठाना है तो पीपीएफ या एनपीएस में निवेश कर सकते हैं। निवेश शुरू करने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपके आर्थिक लक्ष्य क्या हैं, आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और कितनी राशि निवेश कर सकते हैं।

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