कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने शनिवार को कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का ढहना महाराष्ट्र की छवि पर एक धब्बा है और यह दिखाता है कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है। पार्टी की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ने महायुति सरकार पर आरोप लगाया कि वह महाराष्ट्र को पूरी तरह से दिवालिया बना रही है और राज्य की प्रति व्यक्ति आय लगातार घट रही है।
पीएम मोदी ने मांगी थी माफी
इससे पहले, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पालघर दौरे के दौरान सिंधुदुर्ग में शिवाजी महाराज की प्रतिमा के गिरने से हुई क्षति के लिए माफी मांगी। 35 फीट ऊंची यह प्रतिमा 26 अगस्त को ढह गई थी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने चार दिसंबर 2023 को नौसेना दिवस के मौके पर किया था।
चव्हाण ने पीएम की माफी को बताया राजनीतिक
चव्हाण ने प्रधानमंत्री की माफी को लेकर कहा, "यह एक राजनीतिक और सशर्त माफी थी। प्रतिमा का ढहना भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट मामला है। प्रतिमा को कांसे से बनाया जाना जाता। लेकिन इसके बजाय एक 3डी मुद्रित प्रतिमा का इस्तेमाल किया गया था और इसे नट-बोल्ट से जोड़ा गया था। कलाकार अनुभवी नहीं था। यह घटना राज्य की छवि पर एक धब्बा है।"
'महाराष्ट्र में लगातार घट रही प्रति व्यक्ति आय'
उन्होंने कहा, "दोषियों की पृष्ठभूमिक चाहे कोई भी हो, उन्हें उनके कर्मों की सजा मिलनी चाहिए।" राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर उन्होंने भाजपा, शिवसेना और राकांपा की सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, "राज्य पूरी तरह से दिवालिया होने की स्थिति में है। पिछले एक दशक में प्रति व्यक्ति आय लगातार घट रही है।"
'भाजपा के सत्ता में आने से कृषि-उद्योग क्षेत्र पर असर'
उन्होंने यह भी कहा, "कोरोना महामारी के कारण पूर्ववर्ती सरकार ने इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से नहीं संभाला।" उन्होंने कहा, "राज्य के मौजूदा वित्त मंत्री ने हाल ही में राज्य विधानसभा सत्र में प्रति व्यक्ति आय में भारी कमी की पुष्टि की है।" चव्हाण ने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य के कृषि और उद्योग क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन शासकों ने बीते 10 वर्ष संकीर्ण राजनीति में बर्बाद कर दिए हैं।
कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया: मुंगेकर
महाराष्ट्र में इस साल अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पूर्व राज्यसभा सदस्य भालचंद्र मुंगेकर ने कहा, राज्य सरकार को कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए था। लेकिन कृषि विकास को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।