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शिवसेना का आरोप: गैर भाजपा शासित राज्यों में मदमस्त हाथियों की तरह व्यवहार कर रहे राज्यपाल

Thu, 23 Sep 2021 04:27 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में एक लेख में गैर भाजपा शासित राज्यों में कार्यरत राज्यपालों की तुलना मदमस्त हाथियों से की है। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्र में सत्ताधारी भाजपा पर राज्यपाल की शक्तियों का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थ के लिए करने का आरोप लगाया।
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Shivsena - फोटो : Shivsena
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विस्तार
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महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना ने गुरुवार को गैर भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों को निशाने पर लिया। शिवसेना ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र समेत ऐसे राज्यों में जहां भाजपा की सरकार नहीं है, वहां के राज्यपाल 'मदमस्त हाथियों' की तरह व्यवहार कर रहे हैं और राज्य के राजनीतिक ढांचे, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संविधान को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं। 

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पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का बिना नाम लिए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ऐसे राज्यों में स्थिति बिगाड़ने के लिए राज्यपालों का इस्तेमाल कर रही है, जहां पर भाजपा सत्ता में नहीं है। इसने कहा कि राज्यपाल के पद का इस तरह  इस्तेमाल करना हमारे देश के संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला है।

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना नीत महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से संबंध कुछ अच्छे नहीं रहे हैं। अन्य मुद्दों के साथ कोश्यारी अपने कोटा से 12 एमएलसी की नियुक्ति को अनुमति में देरी को लेकर भी राज्य सरकार से खफा हैं। 
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शिवसेना ने कहा, 'गैर भाजपा शासित राज्यों के राज्यपाल मदमस्त हाथी की तरह हैं और उनके महावत दिल्ली में बैठे हैं। ऐसे हाथी लोकतांत्रिक प्रक्रिया, कानून व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं और नया नेतृत्व तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।' 

'आग से खेलेंगे तो आपके हाथ भी जल सकते हैं'
पार्टी ने सवाल किया, 'यह कितना उचित है कि जिन राज्यों में भाजपा के अलावा किसी अन्य पार्टी ने सरकार बनाई है वहां राज्यपाल स्थिति को बिगाड़ने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दे रहे हैं? इस तरह की कोशिशें इस देश की एकता को प्रभावित कर रही हैं। यह आग से खेलने जैसा है। लेकिन याद रखिए कि ऐसा करने में आपके हाथ भी जल सकते हैं।'

शिवसेना ने कहा, अगर कुछ लोगों को लगता है कि दिल्ली में एक नया संसद परिसर बनाने से लोकतंत्र कायम रहेगा और फलेगा-फूलेगा, तो उन्हें उन संघीय सरकारों की चीख-पुकार पर भी ध्यान देना चाहिए जिन्हें कुचल दिया गया है। राज्यों को ठीक से काम करने की अनुमति नहीं है और सरकार के एजेंटों को अराजकता पैदा करने की खुली छूट दी जाती है।

'यूपी और एमपी के राज्यपालों को चिंता क्यों नहीं?'
इसने सवाल किया, 'महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा व कानून व्यवस्था पर चिंता जताई है। लेकिन यही चिंता उत्तर प्रदेश या मध्यप्रदेश के राज्यपालों ने क्यों नहीं जताई? महाराष्ट्र में भाजपा की महिला विधायकों ने भी ये मुद्दा उठाया है। लेकिन क्यों अन्य राज्यों की भाजपा महिला विधायक यूपी या एमपी के लिए ये मुद्दे नहीं उठा रहीं?'

पार्टी ने कहा 'ये (भाजपा) महाराष्ट्र में इतना शोर क्यों मचा रहे हैं? क्योंकि भाजपा यहां सत्ता में नहीं है, जबकि बाकी दो राज्यों में है। यूपी, एमपी में साधु की संदिग्ध मौत या महिलाओं पर हमले जानबूझकर अनदेखे कर दिए जाते हैं।' पार्टी ने गैर भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ कीचड़ उछालने वाले भाजपा नेताओं को पुलिस सुरक्षा देने पर भी केंद्र की आलोचना की।

शिवसेना ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बढ़ती नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। फिर भी, सीआरपीएफ के सैकड़ों जवान कुछ ऐसे लोगों की सुरक्षा में कर रहे हैं जो कुछ राज्यों की सरकारों पर कीचड़ उछालते रहे हैं। जरूरी है कि ऐसे बलों का उपयोग नक्सलवाद के खिलाफ ही किया जाए।

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