भारत समेत तीन देशों के वैज्ञानिकों ने साथ मिलकर पहली बार सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों के चेहरे की हूबहू आकृति बनाने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों को साढ़े चार हजार साल पुराने हरियाणा के राखीगढ़ी में मिले 37 में से दो लोगों की खोपड़ी से चेहरे बनाए हैं।
कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) डेटा के जरिए क्रेनियोफेशियल रीकंस्ट्रक्शन (सीएफआर) तकनीक का प्रयोग करके 15 वैज्ञानिकों और छह शिक्षाविदों की टीम ने खोपड़ियों का असली चेहरा बनाया।
वैज्ञानिकों की इस सफलता ने सिंधु घाटी के लोग कैसे दिखते थे, इसका अनुसान लगाना आसान कर दिया है। इस कार्य को करने के लिए भारत, दक्षिण कोरिया और यूके के वैज्ञानिक शामिल हुए। यह केस स्टडी प्रोफेसर वसंत शिंदे और दक्षिण कोरिया के प्रोफेसर वॉन जू ली के नेतृत्व में की गई, जो एनाटॉमिकल साइंस इंटरनेशनल में प्रकाशित हुई है।
वहीं, इस कार्य को करने के लिए नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी द्वारा वैज्ञानिकों को आर्थिक सहायता दी गई थी। बता दें कि राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले में स्थित एक गांव है, जो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक हमें इसका कोई अंदाजा नहीं था कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कैसे दिखते थे, लेकिन अब उनके चेहरे की आकृतियों का कुछ-कुछ अनुमान लगाया गया है। सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की शारीरिक आकृति का ढांचा तैयार करना अब तक कठिन कार्य था, क्योंकि इस सभ्यता को लेकर अभी तक पर्याप्त मात्रा में खोज नहीं हुई थी और अब तक मिले इसके आंकड़े इस सभ्यता के निवासियों की शारीरिक आकृति के पुनर्निर्माण के लिहाज से काफी नहीं थे।
सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान वर्तमान का राखीगढ़ी, उस दौर में देश का पहला सुनियोजित नगर हुआ करता था। इसकी खोज प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में 2015 में की गई थी। खोज के बाद यहां से कई कंकाल और सभ्यता के अवशेष मिले थे।
अभी तक यही माना जाता था कि पाकिस्तान के सिंध में सिंधु घाटी के आसपास बसी 4500 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता ही देश की सबसे पुराना सभ्यता माना जाता था। हड़प्पा सभ्यता बाहरी नहीं है, इसे हमारे लोगों द्वारा ही बसाया गया था, इसलिए हरियाणा को भारतीय सभ्यता का पालक माना जाता है।