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SC: निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण कानून पर केंद्र से मांगा जवाब, हरियाणा HC के आदेश को दी गई थी चुनौती

Mon, 05 Feb 2024 04:36 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को असंवैधानिक घोषित करने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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राज्य के निवासियों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को असंवैधानिक घोषित करने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान दो जजों की खंडपीठ ने हरियाणा द्वारा दायर अपील पर केंद्र और फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन को भी नोटिस जारी किया है। हरियाणा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह तर्कहीन था। बता दें हरियाणा सरकार ने 17 नवंबर 2023 के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। 
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हाईकोर्ट के कानून को बताया था असंवैधानिक
हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि रिट याचिकाओं को अनुमति दी जानी चाहिए। हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम, 2020 को असंवैधानिक माना गया है। यह लागू होने की तारीख से ही अप्रभावी हो जाएगा। हाईकोर्ट ने 15 जनवरी, 2022 से लागू होने वाले अधिनियम के खिलाफ कई याचिकाएं स्वीकार की थीं और राज्य के उम्मीदवारों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया था। इसमें अधिकतम सकल मासिक वेतन या 30,000 रुपये तक की मजदूरी देने वाली नौकरियां शामिल थीं। हाईकोर्ट की राय थी कि इस मुद्दे पर कानून बनाना और निजी नियोक्ताओं को 30,000 रुपये प्रति माह से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की श्रेणी के लिए खुले बाजार से भर्ती करने से रोकना राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

बता दें इस कानून के तहत राज्य के निवासियों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। 2019 के विधानसभा चुनावों के समय सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी जननायक जनता पार्टी का एक प्रमुख चुनावी वादा था।
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