स्थानीय निवासी मौलाना आसिम उमर के अलकायदा नेटवर्क में शामिल होने की चर्चा और अमेरिकी सरकार की ओर से उस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद एक बार फिर यूपी का संभल खुफिया एजेंसियों के रडार पर आ गया है। यहां खुफिया तंत्र की निगहबानी और तेज हो गई है। स्थानीय कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं।
वह पुराने इनपुट और नई सूचनाओं के आधार पर आतंकी नेटवर्क के बारे में अपने तरीके से सूचनाएं एकत्र करने में व्यस्त है लेकिन इस बारे में कोई कुछ बोलने को राजी नहीं है। आतंकी नेटवर्क से संभल कुछ लोगों का जुड़ाव सामने आने के बाद हर छोटी बड़ी सूचना को खुफिया एजेंसियों के अधिकारी बड़ी गंभीरता से ले रहे हैं। संभल और आसपास अलकायदा के कनेक्शन तलाशे जा रहे हैं। इसके लिए अलकायदा से जुड़े पुराने रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।
पुरानी जानकारियों के आधार पर छानबीन शुरू हो गई है। संभल के आठ लोगों के नाम अलकायदा नेटवर्क से जुड़े होने की बात खुफिया एजेंसियां पहले ही उजागर कर चुकी हैं। इसलिए स्वाभाविक तौर पर संभल में सतर्कता और निगरानी बनी रहेगी। वर्ष 2015 खत्म होते-होते संभल का नाम अलकायदा नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप पहली बार सामने आए थे।
संभल से जुड़े हैं कई आतंकियों के तार
खुफिया एजेंसियों ने की थी कई गिरफ्तारियां
दिल्ली और उड़ीसा में तब एक साथ कार्रवाई हुई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने 16 दिसंबर 2015 को खुफिया जानकारी के आधार पर संभल के दीपासराय निवासी मोहम्मद आसिफ को दिल्ली के सीलमपुर से गिरफ्तार किया था। उसी दिन उड़ीसा में कटक क्षेत्र के जगतपुर पश्चिमकच्चा गांव से मदरसा संचालक मौलाना अब्दुल रहमान को पकड़ा। मोहम्मद आसिफ का मददगार होने के आरोप में संभल के ही जफर मसूद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
जफर मसूद की गिरफ्तारी 17 दिसंबर 2015 को की गई। अब्दुल रहमान और मोहम्मद आसिफ पर भारत में अलकायदा नेटवर्क खड़ा करने का आरोप है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर यकीन करें तो संभल निवासी मौलाना आसिम उमर 1995 में देश छोड़कर पाकिस्तान चला गया था और लंबे समय तक हरकत-उल-मुजाहिद्दीन का लड़ाका बना रहा। इसके बाद तहरीक-ए-तालिबान और अलकायदा के लिए काम करने लगा। उसके काम को देखते हुए आतंकवादी संगठन अलकायदा के विस्तार की जिम्मेदारी दी गई।
भारतीय उप महाद्वीप में अलकायदा का चीफ बनाया गया। इसके संपर्क में आया संभल का मोहम्मद आसिफ अलकायदा का इंडिया चीफ बनाया गया। बताते तो यहां तक हैं कि मौलाना मोहम्मद उमर अपने संपर्को के आधार पर भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे देशों में अलकायदा का नेटवर्क खड़ाकर रहा था। उसके बारे में तमाम देशों से सूचनाएं खुफिया एजेंसियों के पास थीं।
खुफिया एजेंसियों की बढ़ गई बेचैनी
हाफिज सईद की भारत पर टिकी हैं निगाहें
पहले अलकायदा के इंडिया चीफ के तौर पर संभल के मोहम्मद आसिफ की गिरफ्तारी हुई। अब आतंकवादी संगठन की भारतीय उप महाद्वीप शाखा के प्रमुख के तौर पर मौलाना आसिम उमर का नाम घोषित किया गया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को संभल में जन्मे आसिम उमर का नाम वैश्विक आतंकियों की सूची में दर्ज किया। वह भारतीय उप महाद्वीप में अलकायदा का चीफ है। इस खुलासे के बाद संभल और वेस्ट यूपी को लेकर खुफिया एजेंसियों की बेचैनी बढ़ गई है। मंडल के कई जनपदों में इंडियन मुजाहिद्दीन और अलकायदा के संपर्क तलाशने की जिम्मेदारी अब खुफिया एजेंसियों पर आ गई है।
वर्ष 2000 में दिल्ली के लाल किले में आतंकी विस्फोट हुआ था। आतंकी कनेक्शन तलाशे गए थे। घटना का मुकदमा नई दिल्ली के फ्रेंड्स कालोनी थाने में दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस और देश की खुफिया एजेसिंयों ने संभल आकर छानबीन की थी। पूछताछ के लिए संभल के कुछ लोग उठाए गए थे। पकड़े गए लोगों को लंबी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। इस घटनाक्रम की वजह से संभल चर्चा में रहा था। उसमें किसी पर कोई दोष साबित नहीं हो सका था।
आतंकी नेटवर्क को लेकर शासन से फिलहाल कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ है लेकिन जिला पुलिस सतर्क है। एलआईयू को सूचनाएं एकत्र करने के लिए सक्रिय किया गया है।
सभाराज यादव, पुलिस अधीक्षक, संभल