राजनीतिक कर्मभूमि और अपनी लोकसभा क्षेत्र रहे बागपत के खेकड़ा थाने में रखी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा शुक्रवार को नौ साल बाद आखिरकार सशर्त जाट महासभा बागपत को सौंप दी गई। महासभा से इसके लिए पांच लाख रुपये का बांड भी भरवाया गया। एसडीएम दीपाली कौशिक ने बागपत से सपा प्रत्याशी डॉ कुलदीप उज्ज्वल और जिला जाट सभा के पदाधिकारियों को प्रतिमा सौंपी। प्रतिमा को दूध से नहलाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की एक प्रतिमा करीब नौ वर्ष पूर्व हसनपुर मसूरी के पास जेवीजी कॉलोनी के मुख्य द्वार के पास एक पार्क में स्थापित कराने के लिए मंगाई गई थी।
कंपनी का प्रोजेक्ट बंद हो जाने के कारण प्रतिमा को वहां बनी एक दुकान में रखवा दिया गया। कुछ दिन बार यहां शरारती तत्वों ने दुकान का शटर तोड़ा और प्रतिमा को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे किनारे झाड़ियों में फेंक दिया था। खेकड़ा पुलिस प्रतिमा को थाने ले आई। धीरे-धीरे नौ साल गुजर गए, लेकिन प्रतिमा थाने में ही रखी रही। कुलदीप उज्ज्वल ने जिला जाट भवन में प्रतिमा को थाने से छुड़ाने वादा किया था। इस बाबत उन्होंने खेकड़ा थाने में धरने की चेतावनी तक दे दी थी। जाट महासभा के पदाधिकारियों के साथ उन्होंने जिला प्रशासन को मामले से अवगत कराया।
एसडीएम खेकड़ा दीपाली कौशिक ने बताया कि एडीएम के आदेश पर सशर्त प्रतिमा को डॉ कुलदीप उज्ज्वल और जाट महासभा के पदाधिकारियों को सौंपा गया है। इसके लिए पांच लाख रुपये का बांड भी भरवाया गया है। सीओ श्वेताभ पांडेय, महासचिव नागेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष धर्मपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुरेंद्र धामा, संजय धामा, ब्रहमपाल सभासद, डॉ. जितेंद्र यादव, सपा नगर अध्यक्ष जगपाल यादव, रालोद नेता गजेंद्र सिंह, सोनू चौहान, रामकुमार धामा, अरविंद फौजी, प्रमोद पहलवान और रामबीर धामा मौजूद रहे।
क्या रखी गई शर्तें
पांच लाख के बांड पर हुई रिहाई
प्रतिमा को थाने से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ कुलदीप उज्ज्वल ने कहा कि चौधरी साहब की कर्मभूमि में ही अगर प्रतिमा कैद पड़ी है तो हम लोगों के लिए इससे बड़ी शर्म की बात कोई नहीं हो सकती। नौ साल से कैद प्रतिमा के लिए सिर्फ एक महीने के संघर्ष से ही उन्होंने यह कामयाबी हासिल की है। वह चौधरी चरण सिंह के सच्चे अनुयायी है।
प्रशासन की बिना अनुमति के मूर्ति को स्थापित नहीं किया जाएगा। उपयुक्त स्थान पर जहां, प्रशासन की अनुमति होगी, वहीं स्थापित किया जाएगा। मूर्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इससे कोई लाभ नहीं लिया जाएगा। पांच लाख का जो बांड भरा गया है, उसे शर्तों का उल्लंघन करने पर जब्त कर लिया जाएगा।
प्रतिमा को फिलहाल जिला जाट महासभा के सुपुर्द किया गया है। जल्द ही कोई तिथि निर्धारित कर इसके जाट भवन में स्थापित कराने का कार्य किया जाएगा। उधर, प्रतिमा के थाने से मिलने के बाद जाट महासभा के पदाधिकारियों के बीच हर्ष का माहौल बना हुआ है।