राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शनिवार को कहा कि वह मार्च 2024 तक देश के सभी विकास खंडों तक पहुंचने की तैयारी में है। इस बात की जानकारी आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दी। कर्नाटक के धारवाड़ में चल रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक संपन्न होने के बाद तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान होसबाले ने कहा, 'हमने अपनी गतिविधियों को विस्तार देने का निर्णय लिया है। वर्तमान में 6483 विकास खंडों में से 4683 में हमारी उपस्थिति है। हालांकि, हम मार्च 2024 तक भारत के सभी विकास खंडों तक पहुंचना चाहते हैं।'
संघ साल 2025 में अपनी शताब्दी मनाएगा
होसबाले ने कहा कि इन राज्यों में पहुंचने के बाद स्थानीय प्रचारकों को संबंधित राज्यों में संघ के विस्तार के लिए योजना बनानी होगी। संघ की गतिविधियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि रोजाना 34,000 स्थानों पर शाखाएं चलाई जा रही हैं जोकि कोरोना महामारी के दौरान प्रभावित हुई थीं। संघ नेता ने कहा कि दैनिक शाखाएं, साप्ताहिक शाखाएं, पखवाड़ा और मासिक शाखाओं को मिलाकर 55,000 स्थानों पर संघ शाखाओं का संचालन होता है। वहीं, संघ ने उन लोगों से भी अपील की है जो देश भर में इसके आधार का विस्तार करने के लिए दो साल तक स्वेच्छा से काम करना और वर्ष 2025 तक सभी विकास खंडों में इसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना चाहते हैं। संघ साल 2025 में अपनी शताब्दी मनाएगा।
धर्मांतरण पर लगनी चाहिए रोक, ऐसा करने वाले पहले इसकी घोषणा करें
संघ ने धर्म परिवर्तन को लेकर भी अपनी बात रखी। आरएसएस ने कहा कि धर्म परिवर्तन बंद होना चाहिए और धर्म बदलने वालों को इसकी घोषणा करनी चाहिए। संघ ने यह भी कहा कि अगर कोई धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित होता है तो हम उसका स्वागत करेंगे। आरएसएस ने कहा, 'धर्मांतरण को रोका जाना चाहिए और जो लोग धर्म परिवर्तित किए हैं उन्हें इसकी घोषणा करनी होगी कि उन्होंने धर्मांतरण किया है।'
अल्पसंख्यक इसका विरोध क्यों कर रहे हैं यह सबको पता है- होसबाले
कर्नाटक के धारवाड़ में चल रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक संपन्न होने के बाद तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ऐसे लोग हैं जो परिवर्तित हो जाते हैं और यह नहीं बताते हैं कि वे परिवर्तित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वे दोहरा लाभ उठाते हैं। वहीं, धर्मांतरण विरोधी कानून पर आरएसएस के रुख पर एक सवाल के जवाब में होसाबले ने कहा, 'अल्पसंख्यक इसका विरोध क्यों कर रहे हैं यह सबको पता है।' उन्होंने कहा कि किसी भी तरीके से संख्या बढ़ाना, धोखाधड़ी या ऐसे अन्य तरीकों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
10 से अधिक राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित किया है- होसबाले
उन्होंने आगे कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून का न केवल आरएसएस बल्कि महात्मा गांधी और अन्य ने भी इसका विरोध किया है। होसबाले के मुताबिक, देश में 10 से अधिक राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित किया है। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस का आह्वान किया था।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर प्रस्ताव पारित
कार्यकारिणी मंडल की बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है। इस पर बात करते हुए होसबोले ने कहा, बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रही क्रूर हिंसा की हम घोर निंदा करते हैं। बांग्लादेश में हिंदू समाज पर आक्रमण अचानक घटित घटना नहीं है। हिंदू समाज को लक्षित कर बार-बार हो रही हिंसा का वास्तविक उद्देश्य बांग्लादेश से हिंदू समाज का संपूर्ण निर्मूलन है। हम यह भी विश्वास दिलाते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज बांग्लादेश के हिंदू और अन्य प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के इस कठिन एवं चुनौतीपूर्ण समय में उनके साथ डटकर खड़ा है।
पटाखे बंद करने से पहले रोजगार की सोचें
दिवाली के समय कई राज्य सरकारों द्वारा पर्यावरण का हवाला देकर पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने नाखुशी जताई है। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि भले ही पर्यावरण की दृष्टि से यह उचित फैसला है, लेकिन इससे लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर समग्र चिंतन के बाद एक व्यापक नीति बनाने की आवश्यकता है।
जनसंख्या नीति पर प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश में जनसंख्या नीति होनी चाहिए और यह समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऐसी जनसंख्या नीति बनानी चाहिए जो समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू हो। होसबाले ने कहा कि संघ लंबे समय से समान नागरिक संहिता का समर्थन और इसकी मांग करता रहा है।