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संघ का साथ: योगी आदित्यनाथ की जीत के पीछे है RSS की बड़ी भूमिका, 2024 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेगी ये रणनीति

राहुल संपाल
Updated Fri, 11 Mar 2022 01:54 PM IST

सार

उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रचारक ने अमर उजाला को बताया कि हम लोगों से इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करने की अपील करते थे। इस दौरान हम किसी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं लेते थे। बस उनसे इतना ही कहते थे कि 'इस बार वोट राष्ट्र के नाम पर' और मतदाता खुद ही समझ जाते थे। जबकि दूसरे जागरूक मतदाता मंच कार्यक्रम के तहत हम लोगों के घर जाकर उन्हें वोट देने की अपील करते थे...
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योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : PTI (File Photo)


उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रचारक ने अमर उजाला को बताया कि हम लोगों से इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करने की अपील करते थे। इस दौरान हम किसी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं लेते थे। बस उनसे इतना ही कहते थे कि 'इस बार वोट राष्ट्र के नाम पर' और मतदाता खुद ही समझ जाते थे। जबकि दूसरे जागरूक मतदाता मंच कार्यक्रम के तहत हम लोगों के घर जाकर उन्हें वोट देने की अपील करते थे। क्योंकि आमतौर पर मतदाता देर से मतदान के लिए निकलते हैं और कभी कभी वोट करना भूल भी जाते हैं। इसलिए हम चाहते थे कि प्रदेश का हर हिंदू वोट करने जाए और जल्द से जल्द जाए, इसलिए हम इस कार्यक्रम के तहत मतदाताओं को वोट जल्द करने के साथ साथ वोट करने का तरीका भी सिखाते थे। इस दौरान संघ मुख्य तौर पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर लोगों को वोट करने के लिए मनाता था।

डिजिटल कैंपेन पर किया सबसे ज्यादा फोकस

संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए संघ ने अपना डिजिटल प्रचार प्रसार बढ़ा दिया था। हमने उन लोगों के व्हाट्सएप नंबर एकत्र किए, जिनसे हमारा लगातार मिलना-जुलना होता रहता था। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से उनसे अपने विचार साझा करते थे। कार्यक्रमों और वेबिनार के माध्यम से उन्हें जोड़ते थे। वहीं अपने विचार और सरकार के कामों को सोशल मीडिया के जरिए अन्य लोगों तक भी पहुंचाते थे।



उन्होंने कहा कि, इस प्रचार के दौरान हम उन विधानसभा क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देते थे जहां मुस्लिम आबादी 30 फीसदी से अधिक है और हिन्दू वोट संगठित हैं। राष्ट्रवाद को नैरेटिव बनाने के लिए समय समय पर अलग अलग शहरों में किसान, महिला और यूथ की संगोष्ठी का आयोजन किया जाता था। राष्ट्रीय विचार परिषद के बैनर तले एक दिन में कई बड़े-बड़े सेमिनार और वेबिनार भी आयोजित होते थे। लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के मंच पर भाजपा या उम्मीदवारों को नहीं बुलाया जाता था। न ही हमारे मंच पर उनके कोई बैनर या पोस्टर लगाए जाते थे।

संघ ने जनवरी में की थी मनमुटाव छोड़ने की अपील  

संघ के सभी बड़े पदाधिकारियों ने जनवरी से ही यूपी में चुनाव की तैयारी करनी शुरू कर दी थी। संघ के पदाधिकारियों ने तमाम वैचारिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें चुनाव प्रचार का एजेंडा थमा दिया था। इस दौरान संघ ने साफ कर दिया था कि बिना किसी मनमुटाव के सभी संगठनों के लोग अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच सरकार की उपलब्धियां लेकर जाएं। विपक्षी दलों की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के साथ-साथ राष्ट्रवाद को मजबूत करने के लिए लोगों से भाजपा को वोट करने की अपील भी करें।



आरएसएस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, सेवा भारती, विद्या भारती, वनवासी कल्याण, शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, भारतीय किसान संघ, स्वदेशी जागरण मंच, दुर्गा वाहिनी, राष्ट्र सेविका समिति को फरवरी के बाद से ही बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया गया था। दलित वर्ग को साधने के लिए समन्वयक बनाए गए थे, जो दलित बस्तियों में जा रहे थे। वहीं एबीवीपी की ओर से भी युवाओं के बीच अभियान चलाया जा रहा था।


आरएसएस 2024-25 में शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ ने उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत तक संघ की शाखाओं का विस्तार करने सहित अन्य योजना बनाई है। देश में हिंदुओं की आस्था के प्रतीक अयोध्या, काशी, मथुरा सहित अन्य स्थानों से शताब्दी वर्ष का संदेश पूरी दुनिया में देने की योजना है। जानकारों का मानना है कि 2022 का परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव की भी दिशा तय करेगा। संघ का शताब्दी वर्ष भव्यता के साथ मनाया जाए, इसके लिए प्रदेश व देश में भाजपा की सरकार होना आवश्यक है।

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