सुप्रीम कोर्ट ने जेल सुधारों की सिफारिश करने के लिए गठित समिति से आज से छह माह में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट आगे सुनवाई करेगी।
जस्टिस एल. नागेश्वर राव व जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने समिति को शुक्रवार को यह आदेश दिया। पीठ ने रिपोर्ट आने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश उस याचिका की सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें समिति को एक महीने में अंतिम रिपोर्ट देने का निर्देश देने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में उक्त समिति के सामने आने वाली कठिनाइयों का जिक्र किया।
जेलों में अमानवीय स्थिति पर विचार
शीर्ष अदालत देश भर की 1,382 जेलों में अमानवीय स्थिति से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जेल सुधारों की सिफारिश करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अमिताभ रॉय की अध्यक्षता वाली समिति देश भर की जेलों की समस्याओं को देख रही है और उनसे निपटने के उपाय सुझा रही है।
सरकारी अधिकारी भी समिति की सहायता कर रहे हैं और एक निर्धारित समय अवधि में शीर्ष अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं। समिति जेलों में भीड़ के मुद्दे की भी जांच कर रही है। वह कैदियों को सुधार का वातावरण और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के उपाय भी सुझाएगी।
इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2021 में जेल सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे। शीर्ष कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा था कि वह 2012 के बाद जेल में जिन भी कैदियों की अस्वभाविक मौत हुई हो, उनके परिजनों की पहचान के लिए संज्ञान लें और इस मामले में परिजनों को उचित मुआवजा दिलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी. लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने जेल सुधारों के बारे में विस्तार से दिशा निर्देश जारी किए थे। इसके तहत राज्य सरकार से कहा गया है कि पहली बार अपराध करने वाले कैदियों के लिए काउंसलर नियुक्त किया जाए ताकि उनकी काउंसलिंग हो सके। साथ ही कैदियों के मेडिकल सुविधा को लेकर सर्वे करने के लिए कहा गया है। इसके लिए तमाम सुधार वाले कदम उठाने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में जारी दिशा निर्देश
1.सभी राज्य ओपन जेल सिस्टम के बारे में अध्ययन करें। अदालत ने कहा है कि एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया है कि ओपन जेल सिस्टम पर विचार किया जाए। शिमला में ऐसा किया गया है और साथ ही दिल्ली में सेमी-ओपन जेल बेहद कारगर रहा है।
2.बंदियों से परिजनों की मुलाकात को बढ़ावा दिया जाए।
3.कैदियों के साथ उनके परिजनों की फोन पर बातचीत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की संभावना को देखना चाहिए।
4.कैदियों से वकील की बातचीत के बारे में भी विचार करना चाहिए।
5.जेल में बंद कैदियों की आत्महत्या से संबंधित मामले को रोकने के लिए योजना तैयार की जाए। आत्महत्या का विचार करने वाले कैदियों और हिंसक प्रवृत्ति के कैदियों की काउंसलिंग की जाए।