पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि वे आरजी कर अस्पताल की मृतक डॉक्टर के लिए न्याय की मांग को लेकर अपना ‘काम बंद’ जारी रखेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार शाम पांच बजे तक डॉक्टरों को काम पर लौटने का निर्देश दिया है।
पश्चिम बंगाल में कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। राज्य भर में मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन जारी है। विपक्ष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच मृतक प्रशिक्षु डॉक्टर के पिता ने नम आंखों से मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि वह इस मामले में सीएम ममता बनर्जी की भूमिका से खुश नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर इस मामले में कुछ भी नहीं करने का आरोप लगाया।
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पीड़ित डॉक्टर के पिता ने रोते हुए कहा, "हम इस मामले में ममता बनर्जी की भूमिका से खुश नहीं है। उन्होंने कुछ भी काम नहीं किया। जो घटना मेरी बेटी के साथ घटी, मैं शुरू से ही कह रहा हूं कि इसमें विभाग का ही एक व्यक्ति शामिल है। हमें लगता है कि इस बार कोई भी दुर्गा पूजा नहीं मनाएगा। और जो भी इसे मनाएगा, वह खुशी से नहीं मनाएगा, क्योंकि बंगाल और पूरे देश के लोग मेरी बेटी को अपनी बेटी मानते हैं।"
क्या है पूरा मामला?
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना नौ अगस्त की है। मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थीं। आठ अगस्त को अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद रात के 12 बजे उसने अपने दोस्तों के साथ डिनर किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला। घटना के दूसरे दिन सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। पोस्टमॉर्टम की शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। जूनियर महिला डॉक्टर का शव गद्दे पर पड़ा हुआ था और गद्दे पर खून के धब्बे मिले। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक महिला डॉक्टर के मुंह और दोनों आंखों पर था। गुप्तांगों पर खून के निशान और चेहरे पर नाखून के निशान पाए गए। होठ, गर्दन, पेट, बाएं टखने और दाहिने हाथ की उंगली पर चोट के निशान थे।
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आर जी कर के 51 डॉक्टरों को नोटिस
बता दें कि मामले की जांच के लिए आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने 51 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है। उन्हें 11 सितंबर को जांच समिति के सामने पेश होने को कहा गया है। उन पर संस्थान के लोकतांत्रिक माहौल को खतरे में डालने, डराने-धमकाने की संस्कृति को बढ़ावा देने और काम करने वाले माहौल को खराब करने का आरोप है। दरअसल, आरजी कर अस्पताल में एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर की मौत के बाद नौ अगस्त से जूनियर डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि वे आरजी कर अस्पताल की मृतक डॉक्टर के लिए न्याय की मांग को लेकर अपना ‘काम बंद’ जारी रखेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार शाम पांच बजे तक डॉक्टरों को काम पर लौटने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर डॉक्टर काम पर नहीं लौटते तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।