कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि आईटीबीपी ने अपनी कैंटीन में अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को मिलने वाली शराब पर रोक लगा दी है। इससे बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ के पूर्व कर्मचारियों में गुस्सा है। अभी तक चली आ रही व्यवस्था में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी बल की कैंटीन से शराब ले सकते हैं।
आईटीबीपी से 3 अक्टूबर को भी एक ऐसा ही आदेश जारी हुआ है। इसमें लिखा है कि विभिन्न बलों के पूर्व अर्धसैनिकों से कहा जाए कि वे अपनी यूनिट या वार्ब के माध्यम से मदिरा जारी करने के लिए आग्रह करें। रणबीर सिंह ने कहा, आईटीबीपी के डीजी को कौन बताए कि कोविड महामारी के चलते पिछले 9 महीने से इस तरह की कोई बैठक नहीं हो सकी है। वैसे भी वेलफेयर के नाम पर बना 'वार्ब' अर्धसैनिक बलों के परिवारों के साथ एक छलावा है। इसके चेयरमैन सीआरपीएफ डीजी हैं। उन्होंने पद संभालने के बाद केंद्रीय स्तर पर पूर्व अर्धसैनिकों के साथ कोई बैठक आयोजित नहीं की है।
इस बाबत आईटीबीपी के एक अधिकारी का कहना है कि बल की कैंटीन में शराब के लेन-देन को अब डिजिटल माध्यम से जोड़ा जा रहा है। मौजूदा सिस्टम को लेकर कई तरह की शिकायतें मिलती थीं। सेवारत कर्मी या पूर्व कर्मी को ज्यादा शराब मिल गई तो किसी को निर्धारित कोटा भी नहीं मिला, इस तरह के अनेक केस देखने को मिले हैं। कुछ मामलों में यह होता है कि एक व्यक्ति ने दो जगहों से शराब ले ली है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल सिस्टम शुरू किया गया है। केंद्रीयकृत सिस्टम चालू होने से गड़बड़ होने की संभावना खत्म हो जाएगी।