सिंघु बॉर्डर पर मिठाई खाते किसान
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मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून वापस लेने के फैसले के एक दिन बाद सिंघू बॉर्डर का नजारा पूरी तरह बदला हुआ नज़र आया। पहले जहां बॉर्डर पर 'मोदी सरकार मुर्दाबाद', 'काले कानून वापस लो' के नारे से जहां बॉर्डर गूंजता था। अब वहां 'हम जीत गए' के नारे जोर-शोर से लगाएं जा रहे हैं। एक साल से कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसान अपनी जीत की खुशियां केक काटकर, लड्डू बांटकर मना रहे हैं। क़ानून वापस लेने के एलान की इस खुशी में लंगर में खाना खाने वाले लोगों के लिए मिठाई खाना भी जरूरी कर दिया है।
महिलाएं घर लौटने को तैयार बशर्ते संसद से कानून वापस हो
बॉर्डर बैठी महिलाएं कानून वापस होने की खबर के बाद से ही अपने घर जाने की तैयारियों में जुट गई हैं। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी की महिला विंग की प्रमुख गुरजीत कौर गिल अमर उजाला को बताती हैं कि हम लोग सालभर से इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए थे। लेकिन सरकार ने हमारी अभी तक आधी ही मांगें मानी हैं। हम अभी भी एमएसपी सहित अन्य मांगों पर चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन सरकार ने इसका अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी की महिला विंग की सदस्य रणजीत कौर अमर उजाला को बताती हैं कि सालभर से हम लोग अपने परिवार और गांवों को छोड़कर यहां केवल किसान और खेती बचाने में लगे हुए हैं। हर 20 दिन में पंजाब सहित अन्य राज्यों से महिलाओं का जत्था यहां आता है। इसमें करीब 20 से 25 हजार रुपये तक ख़र्च होते हैं। अब सरकार संसद से ये कानून वापस ले तो हम भी अपने घर लौट जाएंगे। क्योंकि हमारा परिवार और हमारा काम भी प्रभावित हो रहा है।
जीत की खुशी में मिठाई, केक और लड्डू
किसान बॉर्डर पर तीनों काले कानून वापस लेने की खुशी केक, मिठाई और लड्डू बांटकर मना रहे हैं। हर जत्थों में किसान अपने लोगों के बीच जाकर केक और लडडू बाट रहे हैं। वही किसानों ने अपनी इस जीत को सेलिब्रेट करने के लिए लंगर में भी खाने का विशेष इतंजाम किया है। शनिवार और रविवार को लंगर के मेन्यू में ख़ासतौर पर मिठाई बनाई जा रही है। वहीं सभी सेवादारों को निर्देश भी दिया गया है कि खाना खाने वाले सभी लोगों को अनिवार्य रूप से खाने में मिठाई जरूर परोसी जाए।
बदला माहौल, हर किसान के चेहरे पर नजर आई खुशी
शनिवार को सिंघु बॉर्डर का माहौल पूरी तरह से बदला हुआ नजर आया। हर किसान के चेहरे पर सिर्फ खुशी नज़र आ रही थी। जब भी किसान एक-दूसरे से मिलते, तो बधाईयां देते हुए दिखाई देते हैं। वहीं किसान संगठनों का अभी भी मंच से अपनी मांगों को लेकर सरकार औऱ पीएम मोदी पर हमला बोलना जारी है। किसान नेताओं का कहना है कि अभी भी सरकार ने हमारी सभी मांगों नहीं माना है। पंजाब और यूपी के चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने ये चाल चली है, लेकिन जब तक संसद से कानून वापस नहीं होता और एमएसपी पर कोई फैसला नहीं होता तब तक हम लोग यहां से नहीं हटेंगे।