राजस्थान के सियासी जानकारों का कहना है कि दलित, मुसलमानों और गुर्जर समुदाय को साथ लेकर बहुजन समाज पार्टी यहां पर सियासत करती है। इस बार भी बहुजन समाज पार्टी ने अपने जितने प्रत्याशी उतारे हैं उनमें सियासी समीकरणों के लिहाज से जातिगत आधार का एक बड़ा पैमाना बनाया गया था। वरिष्ठ पत्रकार हिरेन शर्मा कहते हैं कि राजस्थान में तकरीबन साढ़े सत्रह फीसदी दलित मतदाता हैं। इन मतदाताओं के आधार पर ही बहुजन समाज पार्टी राजस्थान में कांग्रेस की सरकार में हिस्सेदारी भी ले चुकी है। इस बार के विधानसभा चुनाव में फिर से मायावती ने यही सियासी राह अपनाई है। बीते चार दिनों से मायावती लगातार इन्हीं इलाकों में सियासी दौरे भी कर चुकी हैं। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि बसपा के युवा नेता आकाश आनंद राजस्थान में मजबूती के साथ कैंप करके सियासी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए मौजूद हैं।