दिल्ली में बादली स्टेशन के पास से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन 4-5 किमी गए। लाइनमैन के कठिन हालात को देखा। उनके जूते, उनकी वर्दी, उन्हें मिले उपकरण, उसके उपयोग और नये उपकरणों या आवश्यकताओं की जरूरत को जाना, समझा।
अश्विनी लोहानी का कहना है कि जब आप अपने विभाग के जमीन पर काम करने वाले लोगों के साथ होते हैं तो न केवल उनका हौसला बढ़ता है, बल्कि वास्तविकता का सही अंदाजा भी लगता है। उनकी वास्तविक जरूरतों, उनकी चुनौतियों का भी एहसास होता है।