पंजाब में फिर से सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस पार्टी मैदान में उतर गई है, लेकिन पार्टी के 'वन टिकट वन फैमिली' के फॉर्मूले पर ही कांग्रेस के अंदर घमासान मच गया है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी जहां सीएम सहित अन्य विधायकों के परिवार के सदस्यों को टिकट देने से बचते हुए दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी ने दो सांसदों के बेटों को विधानसभा के टिकट दे दिया है। इसके बाद से आलाकमान के फैसले को लेकर आवाज उठने लग गई हैं। इसका असर यह हुआ कि तीन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस विधायक के रिश्तेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतर गए हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम प्रदेश के सीएम चरणजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह का है। इसी तरह अब बटाला सीट पर भी बगावत के आसार नजर आ रहे हैं। पार्टी ने हाल ही में 86 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसके बाद से ही बगावत हो रही है।
राज्य की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सीएम चरणजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह ने दावा ठोका था। उन्होंने सीनियर मेडिकल अफसर की नौकरी तक छोड़ दी। अब कांग्रेस ने वहां से सिटिंग एमएलए गुरप्रीत जीपी को टिकट दे दिया। अब डॉ. मनोहर निर्दलीय लड़ने का एलान कर चुके हैं।
इसी तरह सुल्तानपुर लोधी विधानसभा सीट पर कांग्रेस सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे। कांग्रेस ने राणा को कपूरथला से टिकट दे दी और सुल्तानपुर लोधी से सिटिंग एमएलए नवतेज चीमा को टिकट दे दी। अब राणा के बेटे राणा इंद्रप्रताप ने आजाद लड़ने का एलान कर दिया है।
सीएम चरणजीत चन्नी के खेमे से जुड़े नेताओं को पार्टी का टिकट न दिए जाने को उनके और पीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तकरार के नतीजे के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सिद्धू भी अपने सहयोगियों के लिए सभी टिकट पाने में सफल नहीं रहे हैं। वो भोलाथ और फतेहगढ़ चुरियन से अपने खेमे के नेताओं के लिए टिकट पर नजर गड़ाए हुए थे, पर उन्हें टिकट नहीं मिला। ऐसे ही अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी असंतोष देखा जा रहा है और ये कांग्रेस को महंगा भी पड़ सकता है।
मलोट विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक और पंजाब विधानसभा में डिप्टी स्पीकर अजैब सिंह भट्टी की जगह आम आदमी पार्टी छोड़ आई रुपिंदर कौर रूबी को टिकट मिला है। रूबी इससे पहले बठिंडा ग्रामीण से आप के टिकट पर विधायक थीं। बल्लुआना से विधायक नाथूराम का टिकट काटा है। उनकी जगह राजिंदर कौर को टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर का करीबी होने की वजह से जिन नेताओं का मंत्रीपद छीना था, उन्हें फिर से टिकट दे दिया है। उनमें रामपुरा फूल से गुरप्रीत कांगड़, मोहाली से बलबीर सिद्धू, होशियारपुर से शाम सुंदर अरोड़ा, नाभा से साधु सिंह धर्मसोत के अलावा कैप्टन के सलाहकार रहे कैप्टन संदीप संधू को कांग्रेस ने टिकट दिया है।
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 77 सीटें जीतकर पंजाब में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। 10 साल बाद कांग्रेस ने शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर किया था। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी 117 विधानसभा सीटों वाली पंजाब में 20 सीटों पर कब्जा जमाया था और राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल को 15 और भाजपा को केवल तीन सीटें मिली थी।