भारत-पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ सरल शर्मा का कहना है कि पाक हुक्मरानों को अब यह यकीन हो गया है कि भारत पुलवामा पर चुप बैठने वाला नहीं है। जनरल कमर जावेद बाजवा आईबी पर घूम कर जानकारी जुटा रहे हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही पाकिस्तानी नेता अब एकाएक स्वर बदलने लगे हैं। खुद इमरान खान एक मौका देने की बात कह रहे हैं।
पाकिस्तान इस मामले पर दो तरह से काम कर रहा है। पहला, सेना के जरिए हल्की-फुल्की एवं संतुलित बयानबाजी कराई जा रही है। इसमें विश्व जनमत को यह बताने का प्रयास होता है कि पाक पहले कुछ नहीं करेगा, लेकिन अपनी रक्षा करने के लिए वह प्रतिबद्ध है।
जनरल बाजवा ने रविवार को कहा था, अपने देश का बचाव करना हमारा सबसे पवित्र कार्य है। पाकिस्तानी सेना देश की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। दूसरा, पाकिस्तान विदेश नीति और कूटनीति के जरिए बातचीत शुरु करने का संदेश दे रहा है। उसने यह जिम्मेदारी अपने सिविल लीडर्स को सौंपी है।
वह अंतरराष्ट्रीय जगत को दिखाना चाहता है कि हम शांत तरीके से मामला सुलझाने के पक्ष में हैं, लेकिन भारत शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाह रहा है। शर्मा के मुताबिक, यह बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान की विदेश नीति को कहीं न कहीं सेना ही संचालित करती है। कभी न्यूक्लियर हमले की धमकी तो अगले ही पल नेताओं द्वारा एक मौका और देने की बात कहना, ये सब पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा है।