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इमरान खान के दो सेनाध्यक्षों ने देखा भारतीय बॉर्डर, बदले पाकिस्तानी हुक्मरानों के तेवर

Mon, 25 Feb 2019 08:30 PM IST
तिवारी अभिषेक जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा
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पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान, उनके सिपहसालार और पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ भारत के खिलाफ आग उगल रहे थे, मगर अब उनके तेवर बदल गए हैं। वार्तालाप शुरु करने, मौका देने और शांति बनाए रखने की बात कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हो गया है? क्या यह सब पाकिस्तान के दो सेनाध्यक्षों की वजह से संभव हुआ है?

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थलसेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा, वायु सेना प्रमुख मुजाहिद अनवर खान और आईएसआई ने जब अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर (आईबी) पर नजर दौड़ाई तो उन्हें यह अहसास हो गया कि वाकई भारत कुछ बड़ा कर सकता है। सोमवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी ने अपनी जापान यात्रा भी स्थगित कर दी है।

बता दें कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद भारत ने अपना विरोध जताया तो पाकिस्तानी नेताओं ने अपने तेवर कड़े कर लिए। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान तो यहां तक कह गए कि अगर भारत कुछ ऐसा-वैसा करता है तो वे जवाब देंगे। उनके बाद जब भारतीय सेना ने कहा कि पुलवामा हमले में इस्तेमाल हुआ आरडीएक्स पाकिस्तानी सेना के विस्फोटकों से मेल खाता है।
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इस बयान से पाक नेता फिर तैश में आ गए। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी भारत के खिलाफ आग उगलने लगे। पिछले सप्ताह अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब यह बयान जारी किया कि भारत कुछ बड़ा कर सकता है तो पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई।

पाक थल सेना अध्यक्ष और वायु सेना प्रमुख को आईबी पर भेजा गया। साथ ही आईएसआई जो कि पहले ही सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थी, को भी नए सिरे एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया। इन्होंने जो भी रिपोर्ट सौंपी, उसके बाद पाकिस्तान के न केवल तेवर, बल्कि सुर भी बदल गए। परवेज मुशर्रफ ने भी कह दिया कि पाकिस्तान एक बम गिराएगा तो भारत बीस गिराकर उसे तबाह कर देगा।

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डरा हुआ पाकिस्तान अब इस रणनीति पर कर रहा है काम

भारत-पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ सरल शर्मा का कहना है कि पाक हुक्मरानों को अब यह यकीन हो गया है कि भारत पुलवामा पर चुप बैठने वाला नहीं है। जनरल कमर जावेद बाजवा आईबी पर घूम कर जानकारी जुटा रहे हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही पाकिस्तानी नेता अब एकाएक स्वर बदलने लगे हैं। खुद इमरान खान एक मौका देने की बात कह रहे हैं।

पाकिस्तान इस मामले पर दो तरह से काम कर रहा है। पहला, सेना के जरिए हल्की-फुल्की एवं संतुलित बयानबाजी कराई जा रही है। इसमें विश्व जनमत को यह बताने का प्रयास होता है कि पाक पहले कुछ नहीं करेगा, लेकिन अपनी रक्षा करने के लिए वह प्रतिबद्ध है।

जनरल बाजवा ने रविवार को कहा था, अपने देश का बचाव करना हमारा सबसे पवित्र कार्य है। पाकिस्तानी सेना देश की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। दूसरा, पाकिस्तान विदेश नीति और कूटनीति के जरिए बातचीत शुरु करने का संदेश दे रहा है। उसने यह जिम्मेदारी अपने सिविल लीडर्स को सौंपी है।

वह अंतरराष्ट्रीय जगत को दिखाना चाहता है कि हम शांत तरीके से मामला सुलझाने के पक्ष में हैं, लेकिन भारत शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाह रहा है। शर्मा के मुताबिक, यह बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान की विदेश नीति को कहीं न कहीं सेना ही संचालित करती है। कभी न्यूक्लियर हमले की धमकी तो अगले ही पल नेताओं द्वारा एक मौका और देने की बात कहना, ये सब पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा है।
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