अपनी हालिया नारकोटिक्स और लव जिहाद टिप्पणी पर उठे विवाद के बीच साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के पाला डायोसिस के बिशप जोसेफ कल्लारंगट ने शनिवार को कहा कि छद्म धर्मनिरपेक्षता भारत को नष्ट कर देगी। धर्मनिरपेक्षता का फायदा आखिर किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज सच्चे मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता है।
बिशप जोसेफ ने तोड़ी चुप्पी
गांधी जयंती के अवसर पर चर्च के दैनिक समाचार पत्र अंग दीपिका में प्रकाशित एक लेख में बिशप ने नारकोटिक्स और लव जिहाद टिप्पणी का जिक्र किए बिना उन लोगों पर हमला बोला जो कहते हैं कि किसी को उन बुराइयों के बारे में बात नहीं करनी चाहिए जो उनके अपने समुदाय के ऊपर आती हैं।
पिछले महीने की गई अपनी टिप्पणी के बाद पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बिशप ने परोक्ष रूप से अपनी बात को यह कहते हुए उचित ठहराया कि जो लोग गलतियों के खिलाफ नहीं बोलते हैं, वे चुपचाप उन्हें फलने-फूलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
कहा- सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकृत केरल की ओर बढ़ रहे हम
बिशप जोसेफ का कहना है कि समाज की बुराइयों के खिलाफ जारी की गई चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बजाय, उनको आगे की घटनाओं को रोकने के लिए उन पर चर्चा और गंभीरता से विचार करना चाहिए। मौजूदा केरल समाज में धर्मनिरपेक्षता के बारे में बात करते हुए बिशप ने कहा कि आज की चिंता यह है कि क्या हम धर्मनिरपेक्षता का मार्ग चुनकर सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकृत केरल की ओर बढ़ रहे हैं।
उठाया सवाल- धर्मनिरपेक्षता का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा
उन्होंने कहा कि विभिन्न तबकों से सवाल उठे रहे हैं कि आखिर इस धर्मनिरपेक्षता का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है। बिशप ने कहा कि यह देखते हुए कि धर्मनिरपेक्षता भारत का मूल है, छद्म धर्मनिरपेक्षता देश को नष्ट कर देगी।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है। धार्मिक समुदाय और धर्मनिरपेक्ष समुदाय को एक साथ रहना सीखना चाहिए। भारतीय धर्मनिरपेक्षता का सार यह है कि सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।
बिशप ने लिखा कि हमें यह समझना चाहिए कि पश्चिम में रूढ़िवादी नस्लवादी आंदोलनों के विकास को देखकर धर्मनिरपेक्षता चरमपंथ को कैसे जन्म देती है। अगर हम भारतीय धर्मनिरपेक्षता को उसके शाब्दिक अर्थों में स्वीकार करने में विफल रहते हैं तो भारत की स्थिति अलग नहीं होगी।