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Bengal: 'देश के अन्य हिस्सों में भी हो रहे ऐसे मामले', RG कर मामले पर भागवत की टिप्पणी पर अधीर रंजन का पलटवार

Sat, 12 Oct 2024 07:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

Bengal: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कुछ नया नहीं कहा है। आरजी कर अस्पताल की तरह के मामले केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं,  बल्कि भारत के अन्य हिस्सों में भी हो रहे हैं। हालांकि, कोलकाता में हुई घटना को लेकर पूरे देश में चिंता है। 
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पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरजीकर अस्पताल के गंभीर अपराध की पीड़िता के लिए न्याय की मांग वाले प्रदर्शन केवल पश्चिम बंगाल में नहीं बल्कि पूरे देश में हो रहे हैं। उन्होंने कहा, भागवत ने कुछ नया नहीं कहा है। इस तरह के मामले केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं,  बल्कि भारत के अन्य हिस्सों में भी हो रहे हैं। हालांकि, कोलकाता में हुई घटना को लेकर पूरे देश में चिंता है। 

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इससे पहले विजयदशमी के मौके पर अपने संबोधन में भागवत ने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या के मामले की निंदा की और इसे अपराध और राजनीति का गठजोड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों को बचाने की कोशिश की जहरीली संस्कृति हमें बर्बाद कर रही है। 

उन्होंने न्याय में देरी और अपराधियों को बचाने के प्रयासों की आलोचना करते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया। भागवत ने आरजी कर मामले से निपटने के तरीके को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला किया। 
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आरएसएस प्रमुख ने कहा, कोलकाता के आरजीकर अस्पताल में जो हुआ, वो शर्मनाक है। लेकिन, यह कोई एक घटना नहीं है। हमें ऐसी घटनाएं न होने देने के लिए सतर्क रहना चाहिए। लेकिन, उस घटना के बाद भी जिस तरह से देरी की गई, अपराधियों को बचाने की कोशिश की गई, यह अपराध और राजनीति के गठजोड़ का परिणाम है, जहरीली संस्कृति हमें बर्बाद कर रही है। 

उन्होंने कहा कि हमारा देश ऐसा है कि जब द्रौपदी के वस्त्र छूए गए तो महाभारत हो गया और जब सीता का अपहरण हुआ तो रामायण हो गई। भागवत ने कहा, महिलाओं के प्रति हमारा दृष्टिकोण हमारी मूल्य परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। परिवारों और मीडिया को ऐसे मूल्यों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
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