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Kerala: सीएम विजयन से प्रमुख हस्तियों ने की अपील, फिल्म उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए बनाएं कानून

Wed, 04 Sep 2024 10:07 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल की मलयालम फिल्म उद्योग को लेकर हेमा समिति की रिपोर्ट से मचे बवाल के बीच देश की 72 प्रमुख हस्तियों ने सीएम पिनराई विजयन से संयुक्त अपील की है। इस अपील में फिल्म उद्योग में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर हेमा समिति की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर एक कानून बनाने का आग्रह किया है।
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हेमा समिति की रिपोर्ट को लेकर सीएम विजयन से अपील - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से संयुक्त अपील करने वालों में लेखिका अरुंधति रॉय, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और वृंदा ग्रोवर, अभिनेत्री अपर्णा सेन, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर, संगीतकार टी.एम. कृष्णा, कुछ सेवानिवृत्त नौकरशाह और कई पत्रकार शामिल हैं, जिन्होंने समिति की स्थापना के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए राज्य सरकार से समग्र दृष्टिकोण की मांग की है।
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मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने जिन चिंताओं को उजागर किया है उनमें रिपोर्ट में उल्लिखित यौन दुराचार और अपराधों पर ध्यान केंद्रित करना और फिल्म उद्योग में काम करने की स्थिति, अनुबंधों की कमी, वेतन असमानता जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिनका उल्लेख समिति के निष्कर्षों में भी किया गया है।

टीएम कृष्णा ने महिलाओं के साथ व्यक्त की एकजुटता
हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक, संगीतकार टी एम कृष्णा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में मलयालम सिनेमा में महिलाओं के साथ एकजुटता व्यक्त की और राज्य सरकार से समिति की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मलयालम सिनेमा में महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाते हुए हम केरल सरकार से हेमा समिति की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं, ताकि न केवल यौन उत्पीड़न, बल्कि वेतन असमानता, खराब कार्य स्थितियों और उद्योग में प्रणालीगत असमानता पर भी ध्यान दिया जा सके।
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हस्ताक्षरकर्ताओं ने सीएम विजयन को लिखे अपने संयुक्त पत्र में कहा कि उद्योग में यौन उत्पीड़न और हिंसा के अपने अनुभवों के बारे में महिलाओं की तरफ से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन से मीडिया की चुनिंदा कवरेज को और बढ़ावा मिला है। पत्र में यह भी कहा गया कि जिन महिलाओं ने अपनी दास्तान जनता और मीडिया के साथ साझा की हैं, उन्हें आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। यह एक बहुत ही परेशान करने वाला घटनाक्रम है।

उन्होंने कहा कि सरकार को पुलिस और एसआईटी को सख्ती से निर्देश देना चाहिए कि वे महिलाओं पर दबाव न डालें, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और उनके सर्वोत्तम हितों में काम करें। उन्होंने पत्र में कहा है कि इन परिस्थितियों में, आरोप लगाने वाली महिलाओं को यह निर्णय लेने की अनुमति दी जानी चाहिए कि रिपोर्ट जारी होने के बाद वे अपने व्यक्तिगत अनुभवों के साथ किस प्रकार आगे बढ़ना चाहती हैं।

इसमें आगे कहा गया है कि राज्य सरकार को जनता और मीडिया को संवेदनशील बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम में निवेश करना चाहिए, ताकि यौन शोषण की शिकार महिलाओं की गवाही पर सिर्फ इसलिए संदेह न किया जाए क्योंकि वे लंबे समय तक चलने वाले मामलों को नहीं लड़ सकती हैं या नहीं लड़ना चाहती हैं।
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