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निजी कंपनियों को होगी किराया तय करने की आजादी, रेलवे के साथ साझा करना होगा पूरा राजस्व

Mon, 06 Jul 2020 11:03 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली

सार

निजी रेलगाड़ियां चलने के बाद उसमें एयरलाइन की तरह यात्रियों को पसंदीदा सीट, सामान और यात्रा के दौरान सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ सकता है। यह सकल राजस्व का हिस्सा होगा जिसे संबंधित निजी इकाई को रेलवे के साथ साझा करना होगा। रेलवे के इस बारे में जारी दस्तावेज से यह पता चलता है। रेलवे ने हाल ही में अनुरोध प्रस्ताव (आरएफक्यू) जारी कर निजी इकाइयों को उसके नेटवर्क पर यात्री ट्रेनें चलाने के लिए आमंत्रित किया है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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अधिकारियों के अनुसार इन सेवाओं के लिए यात्रियों से राशि लेने के बारे में निर्णय निजी इकाइयों को करना है। दस्तावेज में कहा गया है कि अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार बोलीदाताओं को परियोजना लेने के लिए अनुरोध प्रस्ताव में सकल राजस्व में हिस्सेदारी की पेशकश करनी होगी। अनुरोध प्रस्ताव के अनुसार रेलवे ने निजी इकाइयों को यात्रियों से किराया वसूलने को लेकर आजादी देगी। साथ ही वे राजस्व सृजित करने के लिए नए विकल्प टटोल सकते हैं।

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आरएफक्यू में कहा गया है, 'सकल राजस्व की परिभाषा अभी विचाराधीन है। वैसे इसमें निम्न बातें शामिल हो सकती है। यात्रियों या किसी तीसरे पक्ष द्वारा यात्रियों को सेवा देने के एवज में संबंधित कंपनी को प्राप्त राशि इसके अंतर्गत आएगा। इसमें टिकट पर किराया राशि, पसंदीदा सीट का विकल्प, सामान/पार्सल/कार्गो (अगर टिकट किराया में शामिल नहीं है) के लिए शुल्क शामिल होगा।'

दस्तावेज के अनुसार, 'यात्रा के दौरान सेवाओं जैसे खान-पान, बिछावन, मांग पर उपलब्ध कराई गई कोई सामग्री, वाई-फाई (अगर टिकट किराया में शामिल नहीं है)। इसके अलावा विज्ञापन, ब्रांडिंग जैसी चीजों से प्राप्त राशि भी सकल राजस्व का हिस्सा होगी।' रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने संवाददाता सम्मेलन में टिकट किराया महंगा होने की आशंका को खारिज करते हुए कहा था कि ये बाजार और प्रतिस्पर्धी कीमत पर आधारित होगा।
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उल्लेखनीय है कि रेलवे ने पहली बार देश भर में 109 मार्गों पर 151 आधुनिक यात्री ट्रेनें चलाने को लेकर निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इस परियोजना में निजी क्षेत्र से करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। निजी कंपनी कहीं से भी इंजन और ट्रेन खरीदने के लिये स्वतंत्र होगी बशर्तें वे समझौते के तहत निर्धारित शर्तों और मानकों को पूरा करते हों। हालांकि समझौते में निश्चित अवधि तक घरेलू स्तर पर होने वाले उत्पादन के जरिए खरीदने का प्रावधान होगा।

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