ऐसे शुरू हुआ अध्ययन
दिल्ली से पटना एम्स पहुंचे वरिष्ठ डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी आने के बाद विश्व के वैज्ञानिकों ने एक जीएसआईडी नामक ऑनलाइन मंच बनाया है, जहां सभी तरह के सैंपल और उनकी सीक्वेंसिंग के बारे में जानकारी दी जाती है। यहीं से बाकी देशों के सैंपल लिए गए और भारत में कर्नाटक, दिल्ली व महाराष्ट्र से सैंपल लेकर अध्ययन किया गया। उन्होंने कहा कि अभी तक यह साक्ष्य मिल चुके हैं कि कोरोना वायरस का सबसे घातक रूप डेल्टा है।
यह सबसे पहले महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मिला था और वहां से दुनियाभर तक पहुंच गया। दूसरी लहर भी डेल्टा की वजह से आई थी। यह एंटीबॉडी को कम करता है और सांस लेने में कठिनाई को बढ़ाता है। ओमिक्रॉन इसके जैसा नहीं है। यह तेजी से फैल सकता है, लेकिन बहुत हद तक जानलेवा नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में इसके प्रसारित होने और एंटीबॉडी कम होने के कारण अलग हो सकते हैं, परंतु भारत में कोई साक्ष्य नहीं हैं।