राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में जमे हुए हैं। वहीं राज्य में पंजाब जैसे हालात न हों इसलिए गांधी परिवार भी सक्रिय हो गया है। हालांकि इस बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में अब पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का पेंच फंस गया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई व्यापक मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने के पक्ष में नहीं है तो वहीं सचिन पायलट अब मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल को लेकर अड़े हुए हैं और 2 साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दिए जाने के पक्ष में हैं। उधर, पायलट ने दौसा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि अगला चुनाव जीतना है तो कांग्रेस संगठन और सरकार को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि जिन कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पिछली बार सत्ता दिलाई है, उनको मान सम्मान मिलना ही चाहिए।
जल्द हो सकता है विस्तार
सूत्रों का कहना है कि राजस्थान सरकार में कुछ नए चेहरों को बतौर मंत्री शामिल किया जा सकता है। हाईकमान से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय की जाएगी। फिलहाल राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र भी दिल्ली में हैं। वे 13 नवंबर को जयपुर लौटेंगे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बीच हाईकमान की सहमति मिलने के बाद सोमवार यानी 15 नवंबर को राजभवन में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। हालांकि, विस्तार की तारीखों में भी पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 17 दिसंबर के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के पक्ष में हैं तो वहीं पार्टी के शीर्ष नेता इसी माह मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दबाव बना रहे हैं।
राजस्थान में गहलोत सरकार 2018 के अंत में बनी थी। अब प्रदेश में सरकार तीन साल पूरे करने जा रही है। अभी तक के कार्यकाल में गहलोत ने एक बार भी विस्तार या फेरबदल नहीं किया है। पिछले साल राज्य में आए सियासी संकट के बाद उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और खाद्य मंत्री रमेश मीणा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा गहलोत सरकार के एक मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल का निधन भी हो गया था।
थोड़ा सब्र रखें, सब पता चल जाएगा: गहलोत