प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नए निदेशक के चयन के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री के अलावा समिति के दो अन्य सदस्य लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमन्ना भी उपस्थित थे। यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर हुई।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवारत 1984, 1985, 1986, और 1987 बैच के वरिष्ठतम अधिकारी इस पद के लिए उम्मीदवार की दौड़ में हैं। वर्तमान में 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा सीबीआई निदेशक का प्रभार संभाल रहे हैं।
सिन्हा को यह प्रभार ऋषि कुमार शुक्ला के सेवानिवृत्त होने के बाद सौंपा गया था। वह दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फरवरी में सेवानिवृत्त हुए थे। बता दें कि देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख का पद मार्च से खाली है।
सूत्रों ने बताया कि इस दौरान सीबीआई के अगले निदेशक के लिए तीन नामों कुमार राजेश चंद्रा, सुबोध कुमार जायसवाल, वीएसके कौमुदी पर चर्चा हुई है। हालांकि, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपनी असहमति जताई है कि उन्हें इन नामों पर चर्चा करने के लिए विचार करने का मौका ही नहीं दिया गया।
दौड़ में कई अधिकारियों के नाम
सीबीआई प्रमुख के लिए जो नाम रेस में हैं, उनमें अंतरिम सीबीआई, बीएसएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख राकेश अस्थाना और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) प्रमुख वाईसी मोदी भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस पद के लिए 1984, 1985 और 1986 बैच के अधिकारियों के नाम पर विचार होगा।
हालांकि, जिन अधिकारियों के नाम पर ज्यादा चर्चा है, उनमें राकेश अस्थाना और वाईसी मोदी और सुबोध जायसवाल शामिल हैं। इसके अलावा, सीआईएसएफ प्रमुख सुबोध कांत जायसवाल, आईटीबीपी के चीफ एसएस देसवाल, केरल के डीजीपी लोकनाथ बेहरा और यूपी के डीजीपी एचसी अवस्थी भी सीबीआई प्रमुख बनने की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं।
अभी फिलहाल 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सिन्हा सीबीआई के कार्यवाहक प्रमुख का कार्यभार संभाल रहे हैं। सीबीआई के डिप्टी चीफ राकेश अस्थाना के साथ हुए विवाद के बाद सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को हटा दिया गया था। इसके बाद ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई का निदेशक बनाया गया था।