देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक जून से बच्चों पर क्लीनिक ट्रायल शुरू करने जा रही है। कंपनी को साल की तीसरी तिमाही तक बच्चों के लिए वैक्सीन लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। कंपनी के बिजनेस डेवलपमेंट और इंटरनेशनल एडवोकेसी हेड डॉ. राचेस ऐल्ला ने कहा कि कंपनी अपनी कोवैक्सीन का पीडिएट्रिक ट्रायल्स जून से शुरू कर सकती है। भारत बायोटेक को हाल ही में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की तरफ से 2-18 साल उम्र के बच्चों के क्लिनिकल ट्रायल्स की मंजूरी मिली थी।
साल के अंत तक 70 करोड़ वैक्सीन का उत्पान
हैदराबाद में फिक्की की महिला विंग के एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डॉ राचेस एला ने कहा कि कंपनी को तीसरी या चौथी तिमाही के अंत तक कोवैक्सिन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से मंजूरी मिल जाएगी। कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब पर डॉ राचेस एला ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि कंपनी की मेहनत रंग ला रही है और वैक्सीन अच्छी तरह से काम कर रही है और लोगों की जान बचा रही है। कंपनी का कहना है कि इस साल के अंत तक अपनी उत्पादन क्षमता 70 करोड़ तक बढ़ा लेगी।
1500 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए
डॉ. राचेस एला ने कहा कि बायोटेक और ICMR के सहयोग से टीका तैयार किया जा रहा है। अब तक सरकार की ओर से पूरा सहयोग और समर्थन मिल रहा है। किया गया है। सरकार ने 1,500 करोड़ रुपये वैक्सीन का एडवांस ऑर्डर दिया है। इसके बाद कंपनी ने बंगलुरू और गुजरात में भी अपना विस्तार कर रही है। कंपनी इस साल के अंत तक अपनी वैक्सीन निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 70 करोड़ डोज कर लेगी।
तीसरी लहर की आशंका
गौरतलब है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिंतबर में कोरोना की तीसरी लहर कहर बरपाएगी, जिसमें सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होंगे। बता दें कि भारत में तीन वैक्सीन उपलब्ध है। कोविशील्ड, कोवैक्सीन और रूस की स्पूतनिक वी । हालांकि कुछ फार्मा कंपनियों ने केंद्र से वैक्सीन बनाने देने की मांग सरकार से की है।