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PM Modi: पीएम मोदी ने कार्डियक सर्जन वालियाथन के निधन पर दुख जताया, कहा- स्वास्थ्य क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी

Fri, 19 Jul 2024 08:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जाने-माने कार्डियक सर्जन डॉक्टर एम.एस. वालियाथन के निधन पर दुख जताया। पीएम ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है।
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पीएम मोदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जाने-माने कार्डियक सर्जन डॉक्टर एम.एस. वालियाथन के निधन पर दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी डॉ. वालियाधन के निधन से दुखी हूं। उनके योगदान ने एक अमिट छाप छोड़ी है और अनगिनत लोगों को लाभान्वित किया है।"

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इसमें उन्होंने आगे कहा, "उन्हें विशेष रूप से लागत प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाले नवाचारों के लिए याद किया जाएगा। वह भारत के चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए भी सबसे आगे थे। मेरी संवेदना उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के साथ है। ओम शांति।" श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) के संस्थापक वालियाथन का बुधवार को निधन हुआ। डॉ. वालियाथन 90 वर्ष के थे।

साल 1934 में केरल में जन्मे डॉक्टर वालियाथन तिरुवनंतपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पहले बैच के छात्र थे। बाद में वह लिवरपूल विश्वविद्यालय गए। 1960 में उन्हें एडिनबर्ग और इंग्लैंड के रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स में फेलोशिप से सम्मानित किया गया। उन्होंने अमेरिका और भारत के कई अस्पतालों में काम किया है। 
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 वालियाथन मनिपल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के पहले कुलपति भी थे और उन्हें स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान के लिए 2002 में पद्मश्री और 2005 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष वालियाथन के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उन्हें देश में पहली बार स्वदेशी मैकेनिकल हार्ट वाल्व प्रोस्थेसिस के विकास का श्रेय दिया जाता है। उनके मार्गदर्श में एससीटीआईएमएसटी ने करीब 12 वर्षों के श्रम के बाद टीटीके-चित्रा वाल्व विकसित किया। अपने सहयोगियों के साथ उन्होंने खुद 190 में एससीटीआईएमएसटी में इस वाल्व को प्रत्यारोपित किया। 

इस वाल्व ने लाखों भारतीयों के जीवन को बचाया। यह उन लोगों के लिए एक वरदान बना, जो कम उम्र में हृदय वाल्व क्षति से पीड़ित थे। इस कम लागत वाली और पूरी तरह से स्वदेशी वाल्व के उन्नत संस्करण एससीटीआईएमएसटी में विकसित किए गए हैं।  

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