सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के प्रशासनिक परिपत्र को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के कारण दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक ही कार्य किया जाए। बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने एसओपी बनाई है और निर्णय के अनुसार हाई कोर्ट 11 जनवरी से 28 जनवरी तक सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक बिना लंच ब्रेक के काम करेगा।
अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर कर 10 जनवरी को जारी सर्कुलर को अवास्तविक और अनुचित करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। याचिका में महाराष्ट्र की सभी अदालतों में आभासी सुनवाई की भी मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है, माननीय अदालत बॉम्बे हाई कोर्ट को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे सकती है कि राज्य की सभी अदालतों में वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हाई कोर्ट के वकीलों/वादियों की शारीरिक उपस्थिति से बचने के लिए अदालतों के समय, काम के घंटों से समझौता व कटौती किए बिना पूर्णकालिक रूप से कार्य करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।
याचिका में कहा गया है कि काम के घंटे कम होने से वकीलों और वादियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उनके मौलिक अधिकारों को खतरे में डाल दिया गया है और इसका उल्लंघन किया गया है जो बहुत चिंता का विषय है और महान सार्वजनिक महत्व का है। जनहित याचिका में मुंबई, पुणे, रायगढ़, अलीबाग और ठाणे में निचली अदालतों के काम के घंटे को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बदलने के फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें रोजाना 50 प्रतिशत कर्मचारी रोटेशन पर मौजूद रहते हैं।