फोन टैपिंग (फाइल फोटो)
- फोटो : iStock
2009 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के बीच हुई एक कथित वार्ता सामने आई थी। बातचीत के लिखित अंश प्रकाशित होने पर अमर सिंह ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
अरुण जेटली के फोन टैपिंग का मामला
तब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 केंद्र सरकार या एक राज्य सरकार को यह शक्ति देती है कि वो देश की संप्रभुता या अखंडता के हित में किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्न, संचारित, प्राप्त या संग्रहीत किसी भी सूचना को इंटरसेप्ट, मॉनिटर या डिक्रिप्ट या इंटरसेप्ट कर सकती है।
फोन टैपिंग के मामले में यह भी नियम है कि किसी भी व्यक्ति का फोन एक बार अनुमति मिलने के बाद दो महीने तक टैप किया जाएगा। इसके बाद समय अवधि बढ़ाने के लिए फिर से अनुमति लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति का फोन अधिकतम छह महीने ही टैप किया जा सकता है।
2013 में भाजपा नेता अरुण जेटली के फोन टैपिंग मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है। इसमें दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अरविंद डबास और तीन अन्य जासूसों अनुराग, नीरज और नीतीश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 464, 467, 468, 471, 120 (बी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था। डबास को 2013 में कथित रूप से जेटली की कॉल डिटेल की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार डबास ने वरिष्ठ भाजपा नेता के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) के लिए मोबाइल सेवा प्रदाता को अनुरोध भेजने के लिए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) की आधिकारिक ईमेल आईडी इस्तेमाल किया था।