पेगासस मामले में केंद्र सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को मांगी गई जानकारी गुप्त रखे जाने का तर्क साबित करना चाहिए कि इसके खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ेगा।उसे अदालत के सामने रखे जाने वाले पक्ष को भी सही ठहराना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा, अगर केंद्र सरकार 16 अगस्त को एक सीमित हलफनामा दाखिल करने के बजाय इस मामले में अपना रुख स्पष्ट कर देती तो यह एक अलग स्थिति होती।
गरीब की झोपड़ी में बारिश का पानी आ सकता है, राजा नहीं
ब्रिटिश राजनीतिज्ञ विलियम पिट के कथन का उल्लेख कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘सबसे गरीब आदमी अपनी झोपड़ी में रहकर भी बादशाह की समस्त शक्तियों की अवज्ञा कर सकता है। उसकी छत कच्ची हो सकती है, तूफानी हवा उसे थरथरा सकती है, बारिश का पानी भीतर आ सकता है, लेकिन इंग्लैंड का राजा भीतर नहीं आ सकता। घर चाहे खंडहर हो जाए, राजा की समस्त सेना उसकी दहलीज लांघ भीतर नहीं आ सकती। यही कानून है।’
जीवन व निजता आपस में जुड़े हैं
सुप्रीम कोर्ट ने कई उदाहरणों के परिप्रेक्ष्य में कहा, भारत में निजता के अधिकार जीवन के अधिकार से जुड़े हैं। हमारे संविधान ने जीवन के अधिकार को रूढ़िवादियों की तरह सीमित न रखकर इसे विस्तृत परिभाषा दी है। इसमें जीवन का ऊंचा स्तर भी समाहित है, इसे पशु की भांति केवल अस्तित्व बनाए रखने की तरह नहीं देखा गया।
सिफारिश : राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा व जांच एजेंसी बनाने पर मांगे सुझाव
कब क्या हुआ
इनकी निगरानी में होगी जांच
ये अधिकारी होंगे निगरानी समिति प्रमुख के सहायक
जांच समिति की विशेषज्ञ त्रिमूर्ति : प्रो. नवीन कुमार चौधरी : साइबर सुरक्षा में 20 साल का अनुभव
गांधीनगर के राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय के डीन। साइबर सुरक्षा व डिजिटल फॉरेंसिक के प्रोफेसर नवीन 20 साल से अकादमिक क्षेत्र में हैं। साथ ही, साइबर सुरक्षा, साइबर नीति, नेटवर्क में खामियां तलाशने वाले विशेषज्ञ भी हैं।
प्रो. प्रभारन पी : सुरक्षा खामियां तलाशने की विशेषज्ञता
अमृता विश्व विद्यापीठ केरल में इंजीनियरिंग के प्रोफेसर। दो दशक से कंप्यूटर साइंस व सुरक्षा पर काम कर रहे हैं। डिवाइस में मालवेयर की पहचान, बुनियादी सुरक्षा, जटिल बाइनेरी विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग के विशेषज्ञ।
अश्विन अनिल गुमस्ते : 20 पेटेंट और 150 प्रकाशन हैं इनके नाम
आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में एसोसिएट प्रोफेसर। 20 अमेरिकी पेटेंट हासिल। 150 शोधपत्र प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित। तीन पुस्तकें भी लिखी हैं। विक्रम साराभाई अवॉर्ड व एसएस भटनागर पुरस्कार विजेता।
इन बिंदुओं पर होगी पड़ताल
जांच के क्रम में किसी भी व्यक्ति के बयान दर्ज करने की होगी इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि तकनीकी समिति को पेगासस मामले की जांच के क्रम में किसी भी व्यक्ति के बयान दर्ज करने और किसी भी अथॉरिटी या व्यक्ति से रिकॉर्ड तलब करने की इजाजत होगी, साथ ही समिति को किसी भी तरह की जांच की स्वतंत्रता होगी, जो उसे उचित लगे। इसमें कोई बाध्यता नहीं होगी।
राजनीति नहीं, लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है पेगासस : कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट के पेगासस मामले की जांच के लिए कमेटी गठन के आदेश का कांग्रेस ने स्वागत किया है। राहुल गांधी ने कहा कि ये हरगिज राजनीतिक मामला नहीं है, देश के लोकतांत्रिक ढांचे, सांविधानिक संस्थाओं और लोगों की आजादी पर हमला है। राहुल ने आरोप लगाया कि ये काम प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के अलावा तीसरा कोई नहीं कर सकता।
अगर ऐसा किया गया है तो आपराधिक मामला है। सरकार ने देश में राजनीतिक कंट्रोल और ब्लैकमेल करने एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट का ये बड़ा कदम है। मुझे विश्वास है सत्य जरूर सामने आएगा।
यह फैसला स्वार्थी तत्वों का झूठ सामने लाने के लिए सही: भाजपा
सत्तारूढ़ भाजपा ने फैसले को सरकार के रुख के अनुरूप ही बताया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि केंद्र सरकार तो सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कह चुकी है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के झूठ को सामने लाने के लिए यही सही रहेगा कि विशेषज्ञों की एक समिति मामले की निष्पक्ष जांच करे। कोर्ट ने केंद्र की सलाह ही मानी।
पात्रा से पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने तो सरकारी जांच कमेटी के गठन को खारिज कर दिया है तो उन्होंने कहा इससे फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि विशेषज्ञ तो विशेषज्ञ ही होता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मजाक बनाते हुए कहा कि उन्हें झूठ बोलने की आदत पड़ चुकी है।
सरकार की सहयोगी जदयू ने फैसले को बताया ऐतिहासिक
केंद्र सरकार की सहयोगी जदयू ने पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। पार्टी ने कहा कि इस अहम मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट न होने के कारण ही कमेटी का गठन करना पड़ा है। पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने कहा, हम शुरू से इस मामले की जांच की मांग कर रहे थे। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सच्चाई सामने लाने के लिए जांच कराने का सुझाव दिया था।