सोमवार से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष की रणनीति किसान आंदोलन, कोरोना कुप्रबंधन और महंगाई के मामले में सियासी मुठभेड़ की थी। दोनों ही पक्षों ने इन मुद्दों पर एक दूसरे पर वार-पलटवार करने के लिए लंबी माथापच्ची की थी। हालांकि रविवार देर रात इस्राइली स्पाईवेयर पेगासस के जरिये जासूसी मामले के खुलासे ने अन्य सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है।
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने दूसरे मुद्दों की जगह जासूसी मामले पर सरकार को घेरने की प्राथमिकता देने की नई रणनीति तैयार की है। दूसरी ओर सरकार भी दूसरे मुद्दों पर पलटवार करने के बदले जासूसी मामले में विपक्ष के हमले का जवाब देने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। विपक्ष ने इस मामले में पहले दिन की तरह ही तीखे तेवर बरकरार रखने के साफ संदेश दिया है।
सरकार ने कोरोना मामले में की थी लंबी तैयारी
सत्र से पहले खुद प्रधानमंत्री की अगुवाई में सरकार और राजग ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें, किसान आंदोलन और कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अव्यवस्था जैसे मुद्दे पर विपक्ष पर पलटवार करने की रणनीति बनाई थी। सरकार को विश्वास था कि विपक्ष मुख्य रूप से इन्हीं तीन मुद्दों पर हमला बोलेगा। विपक्ष की रणनीति को भांपते हुए पीएम ने वित्त, स्वास्थ्य और कृषि मंत्री को इन मुद्दों पर अलग-अलग खास तैयारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि अब अचानक जासूसी मामले के केंद्र में आ जाने के बाद सरकार अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर हुई है।
विपक्ष भी रणनीति बदलने पर मजबूर
सरकार की तरह विपक्ष के एजेंडे में महंगाई, किसान आंदोलन, कोरोना जैसे अहम मुद्दे ही थे। अकाली दल और आप ने किसान आंदोलन के मामले में कार्यस्थगन प्रस्ताव भी दिया था। कांग्रेस ने कोरोना की दूसरी लहर में हुई जानमाल की हानि, टीकाकरण में हीलाहवाली जैसे मुद्दे को पहली वरीयता देने का मन बनाया था। हालांकि जासूसी प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्ष ने भी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। अब कांग्रेस, वामदल, टीएमसी, बसपा जैसे कई दलों का सबसे अहम एजेंडा जासूसी मामला है।
आनन-फानन में कराया आईटी मंत्री का बयान
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले जासूसी मामले में आईटी मंत्री का बयान कराने की कोई योजना नहीं थी। मंत्रियों के परिचय के बाद सरकार को कोरोना की दूसरी लहर के संदर्भ में अपना पक्ष रखना था। हालांकि जब जासूसी मामले ने तूल पकड़ा तो आनन-फानन में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में तो पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का प्रेस कॉन्फ्रेंस कराने का फैसला किया गया।
हंगामा जारी रहने के आसार
पहले विपक्ष की रणनीति पहले दिन हंगामे के बाद किसान आंदोलन, कोरोना और महंगाई पर बारी बारी से चर्चा कराने पर राजी होने की थी। हालांकि अब जासूसी मामले में विपक्ष की नई योजना कड़े तेवर जारी रखने की है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री से सदन में बयान देने की मांग की है। विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल वह इस मुद्दे को तूल देने के पक्ष में है। जाहिर है कि इसका असर सदन की कार्यवाही पर पड़ना तय है।