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आतंकियों का आका पाकिस्तान: इमरान खान ने कहा- हक्कानी आतंकी नहीं बल्कि अफगानी कबीलाई संगठन, अफगानिस्तान में मचा बवाल

सार

रक्षा मामलों के जानकार कर्नल (रि.) एसएम शाह कहते हैं कि हक्कानी नेटवर्क ने मध्य एशिया में बहुत ज्यादा आतंक फैलाया है। नाटो सेना के ऊपर अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क लगातार हमले करता आया है और इनके हमलों में अमेरिका और अन्य नाटो संगठन के सैनिकों की मौतें भी हो चुकी हैं...
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हक्कानी और इमरान खान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुलकर आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क का समर्थन करना शुरू कर दिया है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज हुए तालिबानियों के समर्थक और हक्कानी नेटवर्क के मुखिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर अपनी सहमति जताई। इमरान खान के आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के समर्थन के साथ अफगानिस्तान की सड़कों पर विरोध शुरू हो गया है।

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अफगानिस्तान में तालिबानियों के सत्ता पर काबिज होने के साथ ही विवाद शुरू हो गया था। पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध है इस बात की जानकारी पूरी दुनिया को थी लेकिन आईएसआई चीफ के काबुल दौरे के साथ यह स्पष्ट हो गया था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में न सिर्फ मदद कर रहा है बल्कि आतंकवाद फैलाने में भी भूमिका निभा रहा है। मध्य एशिया मामले के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आरएस चंद्रा कहते हैं कि तालिबानियों की सरकार में जब सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह मंत्री बनाया गया था तभी से इस बात की आशंका जताई जाने लगी थी कि पाकिस्तान का दखल अफगानिस्तान में बहुत ज्यादा होने वाला है। प्रोफेसर चंद्रा कहते हैं अब जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी हक्कानी को आतंकवादी संगठन ना मानते हुए कबीलाई संगठन ही मानते हैं तो इस बात की पुष्टि होती है कि पाकिस्तान पूरी तरीके से आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क का समर्थन कर रहा है। वह कहते हैं हालांकि इसमें किसी भी तरीके से चौंकने वाली बात नहीं है क्योंकि पाकिस्तान शुरुआत से ही हक्कानी नेटवर्क का समर्थन करता आया था।

दरअसल पाकिस्तान शुरुआत से ही अपने कई राज्यों में हक्कानिया मदरसा के माध्यम से जिहादी नेटवर्क तैयार करता रहा है। तालिबान के नए गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के मुखिया सिराजुद्दीन हक्कानी भी पाकिस्तान के इसी हक्कानिया मदरसा का छात्र रहा है। यह मदरसा सबसे ज्यादा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बॉर्डर वाले इलाकों में अपने जिहादी आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर मैदान में उतारता आया है। रक्षा मामलों के जानकार कर्नल (रि.) एसएम शाह कहते हैं कि हक्कानी नेटवर्क ने मध्य एशिया में बहुत ज्यादा आतंक फैलाया है। नाटो सेना के ऊपर अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क लगातार हमले करता आया है और इनके हमलों में अमेरिका और अन्य नाटो संगठन के सैनिकों की मौतें भी हो चुकी हैं।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक टीवी चैनल में जब खुलकर इस बात का समर्थन किया कि हक्कानी नेटवर्क कोई आतंकी संगठन नहीं बल्कि कबीलाई संगठन है, तो अफगानिस्तान के बहुत से जिलों में प्रदर्शन शुरू हो गए। अफगानिस्तान से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान को लेकर बीते कुछ समय से लगातार अफगानिस्तान के अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसमें इमरान खान का हक्कानी नेटवर्क के समर्थन में दिया गया बयान आग में घी का काम कर गया। काबुल से लेकर कंधार और हेरात से लेकर बालटिस्तान तक में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

अफगानिस्तान के लोगों को इस बात का अंदाजा है कि पाकिस्तान पूरी तरीके से अफगानिस्तान की सत्ता में अपना दखल दे रहा है। यही वजह है कि यहां के लोग इस बात को पसंद नहीं कर रहे हैं और पाकिस्तान के विरोध में लगातार प्रदर्शन भी हो रहे हैं। आईएसआई चीफ के काबुल दौरे के बाद से जिस तरीके से हक्कानी नेटवर्क के पांच लोगों को तालिबान की सत्ता में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई, वह भी लोगों को नागवार गुजरी। अफगानिस्तान के लोग तो शुरुआत से ही तालिबान के विरोध में है लेकिन पाकिस्तान के ज्यादा दखल से और समस्याएं बढ़ती ही जा रहे हैं। काबुल के वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल हामिद बताते हैं कि यहां के हालात बदतर तो तालिबान की वजह से हैं, लेकिन पाकिस्तान पूरी तरीके से बर्बाद करने पर आमादा है। अब्दुल का कहना है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह बयान साबित करता है कि वह आतंकी संगठन हक्कानी के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर न सिर्फ मध्य एशिया बल्कि पूरी दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
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