अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर अपने विधायकों को खरीदने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के पंजाब के विधायकों को खरीदने की कोशिश की गई और हर विधायक को खरीदने के लिए उन्हें 25-25 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई। आप का आरोप है कि पंजाब के 55 विधायकों को खरीदकर पंजाब की सरकार गिराने की साजिश रची गई थी, लेकिन भाजपा की यह कोशिश सफल नहीं हो पाई। इसके पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में भी अपने विधायकों को खरीदने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया था। वहीं, भाजपा ने इसे अरविंद केजरीवाल के द्वारा बिना आधार के आरोप लगाकर खबरों में बने रहने की कोशिश बताया है।
केजरीवाल ने यह आरोप ऐसे समय में लगाया है, जब गोवा में कांग्रेस के आठ विधायकों ने अपनी पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। ऐसे में आम आदमी पार्टी के इन आरोपों पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई। लेकिन आम आदमी पार्टी ने अब तक दिल्ली में विधायकों को खरीदे जाने का कोई सबूत उपलब्ध नहीं कराया है, जिसके कारण इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े हो गए थे।
दिल्ली प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल केवल चर्चा में रहने के लिए इस तरह के बिना आधार के आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों ने अपने लिए एक मुख्यमंत्री चुना था, लेकिन उसे एक विज्ञापन मंत्री मिल गया है। अरविंद केजरीवाल ने अपने पास कोई मंत्रालय नहीं रखा है, जिससे उन पर दिल्ली की जनता के हित के लिए कोई काम करने का दबाव न रहे। इसके बदले में वे केवल अपने प्रचार करने का काम करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसा कोई दूसरा मुख्यमंत्री नहीं है, जिसने अपने पास कोई विभाग नहीं रखा हो। यही दिखाता है कि वे दिल्ली के लोगों के विकास के लिए स्वयं कोई काम नहीं करना चाहते हैं। बल्कि, वे जनता के पैसे पर मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे राज्यों में जाकर अपना और अपनी पार्टी का प्रचार करते रहते हैं।