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One Nation One Election: एक देश एक चुनाव का विरोध, CPI का समर्थन न करने का एलान, TMC ने बताया सरकारी नौटंकी

Mon, 16 Sep 2024 06:39 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्र, एक चुनाव की जोरदार वकालत की थी। साथ ही तर्क दिया था कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति में बाधा बन रहे हैं।
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टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन और सीपीआई नेता डी राजा - फोटो : ANI
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विस्तार
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एक देश एक चुनाव को लेकर विरोध शुरू हो गया है। सीपीआई एम ने एक देश एक चुनाव का समर्थन न करने का एलान किया है। जबकि टीएमसी ने इसे सत्तारूढ़ दल की नौटंकी करार दिया।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सवाल किया कि हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के साथ महाराष्ट्र चुनावों की घोषणा क्यों नहीं की गई? राज्यसभा में TMC संसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव लोकतंत्र विरोधी भाजपा का एक और हथकंडा है।

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वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी एक राष्ट्र, एक चुनाव प्रस्ताव का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि मैं एक राष्ट्र एक चुनाव की समिति का नेतृत्व कर रहे पूर्व राष्ट्रपति से मिला था। राजा ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है और यहां संसद-राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव होते रहते हैं। संविधान लोकसभा, राज्य विधानसभा के कार्यकाल, निर्वाचित मुख्यमंत्रियों और राज्यों में सरकारों की शक्तियों को स्पष्ट करता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों से सभी शक्तियां नहीं छीन सकती। इस मुद्दे पर संविधान सभा में चर्चा हुई थी और चीजें बहुत स्पष्ट हैं। सीपीआई नेता ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्थायी आयोग है जो अपनी सारी शक्तियां संविधान से लेता है। आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का जनादेश मिला है।
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राजा ने कहा कि देश में एक राष्ट्र-एक चुनाव लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी के लिए समान अवसर देना चाहिए। डी राजा ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार को अविश्वास प्रस्ताव के जरिये सदन में हराया जा सकता है या निर्वाचित मुख्यमंत्री कैबिनेट की सलाह पर विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकता है। उन्होंने इनके परिणाम पूछे और कहा कि ऐसे कई सांवधानिक और व्यावहारिक सवाल हैं।

पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्र, एक चुनाव की जोरदार वकालत की थी। साथ ही तर्क दिया था कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति में बाधा बन रहे हैं।
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