दरअसल, 96 सालों में पुरानी संसद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भीषण बहसों, जोरदार हंगामों, सांसदों के भाषणों, ऐतिहासिक कानून और विधेयकों के पारित होने की गवाह रही है। इसके साथ देशवासियों का भी एक भावनात्मक जुड़ाव रहा है। हालांकि, अब जगह और सुविधाओं की कमी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते दौर के चलते खामियों को देखते हुए सरकार ने नई पार्लियामेंट बिल्डिंग तैयार की है। 64,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में तैयार किया गया नया संसद भवन सभी तकनीकी सुविधाओं से लैस है और दोनों सदनों की कैपेसिटी भी बढ़ा दी गई है।
संसद भवन से जुड़े अधिकारियों ने अमर उजाला को बताया कि,मंगलवार से सदन की कार्यवाही नई संसद भवन में शुरू हो जाएगी। लेकिन पुराने संसद भवन में अभी भी सचिवालय का स्टाफ काम करता रहेगा। कुछ दिनों बाद संबंधित स्टाफ नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया जाएगा। बाकी अन्य विभाग पुरानी बिल्डिंग से ही चलेगे।
अफसरों ने कहा कि, पुराने संसद भवन को संरक्षित कर रखा जाएगा। क्योंकि यह देश की पुरातात्विक संपत्ति है। आने वाले दिनों में भवन की मरम्मत काम पूरा इसे संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाएगा। विजिटर्स इस म्यूजियम में आ सकेंगे और जहां पर फिलहाल संसद की कार्यवाही होती है, वहां और चैंबर में भी वह बैठ सकेंगे। आने वाले दिनों में एक हिस्से को म्यूजियम बना कर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। विजिटर्स को अब पुराने भवन के साथ नई संसद को देखने का भी मौका मिलेगा। इसके अलावा संसद भवन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए पुराने भवन के सेंट्रल हॉल का उपयोग किया जाता रहेगा।