फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida Twin Towers: ट्विन टॉवर ढहाने की जगह वैकल्पिक समाधान की मांग, SC ने लगा दिया पांच लाख जुर्माना

Mon, 01 Aug 2022 10:09 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष अदालत ने 12 जनवरी को सुपरटेक लिमिटेड को जुड़वां टावरों को ध्वस्त करने के अपने आदेशों का पालन नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी। 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें नोएडा में कथित रूप से भवन मानदंडों के उल्लंघन में निर्मित सुपरटेक लिमिटेड के जुड़वां 40-मंजिला टावरों को ढहाने के अलावा कोई वैकल्पिक समाधान के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने एनजीओ सेंटर फॉर लॉ एंड गुड गवर्नेंस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि लागत को रजिस्ट्री में जमा किया जाए ताकि कोविड से प्रभावित वकीलों के परिवार के सदस्यों के हित में इसका उपयोग किया जा सके। 

विज्ञापन


शुरुआत में ही पीठ ने एनजीओ को दी थी चेतावनी 
शुरुआत में पीठ ने एनजीओ की ओर से पेश वकील को चेतावनी दी कि यदि वह जनहित याचिका आगे बढ़ाते हैं तो वह याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि पिछले साल 31 अगस्त को इसे ढहाने का आदेश पारित किया गया था और समीक्षा याचिका भी खारिज होने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। पीठ ने कहा कि टॉवरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था क्योंकि वे भवन उप-नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अदालत ने वकील से कहा कि जनहित याचिका एक ऐसे निर्देश की मांग करती है जो इस अदालत के फैसले के विपरीत है। इसके बाद इसने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

29 जुलाई को शीर्ष अदालत ने रियल्टी फर्म सुपरटेक को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था, जिसने नोएडा सेक्टर 93ए में जुड़वां 40-मंजिला टावरों को ध्वस्त करने की सलाह दी है। 21 अगस्त को नियंत्रित विस्फोटों के माध्यम से टावरों को ध्वस्त किया जाना है। 
विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने 12 जनवरी को सुपरटेक लिमिटेड को जुड़वां टावरों को ध्वस्त करने के अपने आदेशों का पालन नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी और चेतावनी दी थी कि इसके निदेशकों को अदालत के साथ खिलवाड़ करने के लिए जेल भेजा जाएगा। पिछले साल 31 अगस्त को शीर्ष अदालत ने नोएडा के अधिकारियों के साथ मिलीभगत से इमारत के मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए तीन महीने के भीतर निर्माणाधीन टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें