मृतक के परिवार ने लौटाया सरकार का मुआवजा
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पश्चिम बंगाल में आरजी कर केस के बाद से जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन को लेकर भले ही राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार और उसके मंत्री कुछ अलग दावा करें, लेकिन जमीनी स्तर पर सच्चाई अलग ही दिखाई पड़ रही है। दरअसल हाल ही में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से इन प्रदर्शनों के कारण बाधित हुई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के जान गंवाने वालों के लिए मुआवजे का एलान किया है। वहीं राज्य में एक मृतक के परिवार ने सरकार की तरफ से दी जा रही मुआवजे की धनराशि लेने से इनकार किया है।
परिवार ने राज्य सरकार के दावे को किया खारिज
बता दें कि दक्षिण दिनाजपुर जिले के एक सरकारी अस्पताल में दम तोड़ने वाले 10 वर्षीय लड़के के परिवार ने 2 लाख रुपये का मुआवजा ठुकराते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि जूनियर डॉक्टरों के चल रहे आंदोलन के कारण उनके बेटे की मौत हुई है।
'वरिष्ठ चिकित्सक की लापरवाही के कारण हुई मौत'
जानकारी के मुताबिक कक्षा 3 में पढ़ने वाला छात्र शिवम शर्मा सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था, जिसके बाद उसे बालुरघाट अस्पताल ले जाया गया। इस मामले में उसके परिवार ने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ चिकित्सक की लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई, जिसने ड्यूटी पर होने के बावजूद उसके इलाज में देरी की। परिजनों ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक के समय पर नहीं आने के कारण शिवम की मौत हुई। उस वक्त अस्पताल में कोई जूनियर डॉक्टर नहीं था और उसकी मौत आरजी कर अस्पताल में हुई घटना के तीन दिन बाद 12 अगस्त को हुई। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन अपने शुरुआती चरण में था। इसलिए यह दावा गलत है कि वह जूनियर डॉक्टरों के काम बंद करने के कारण उनके बेटे की मौत हुई।
'किसी और पर दोष मढ़ने के बजाय आरोपी पर हो कार्रवाई'
उन्होंने कहा, किसी और पर दोष मढ़ने के बजाय अधिकारियों को उस वरिष्ठ चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिसकी लापरवाही ने एक अनमोल जीवन को छीन लिया। राज्य सरकार की तरफ से दिए गए मुआवजे को ठुकराते हुए उन्होंने कहा, हम दोषियों के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं, न कि आर्थिक मदद।